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आईपीसी धारा 279 क्या है | धारा 279 के मामलो मे साक्षीगणो को पुछे जानेवाले सवाल | धारा 279 मे कितनी सजा मिलती है | What is Section 279 of I.P.C.

आईपीसी धारा 279 क्या है | धारा 279 के मामलो मे साक्षीगणो को पुछे जानेवाले सवाल | धारा 279 मे कितनी सजा मिलती है | What is Section 279 of I.P.C.



परिचय

भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 279 के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति किसी वाहन को सार्वजनिक मार्ग पर जल्दबाजी अथवा लापरवाही से चलाता है, जिससे मानव जीवन पर कोई संकट अथवा कोई चोट अथवा आघात पहुंचाता है, तो उसव्यक्ति पर भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 279 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया जाता है। इस धारा के अंतर्गत दोषी व्यक्ती को छह महीने तक की जेल की सजा और एक हजार रुपये तक का चालान भी लगाया जा सकता है। अथवा दोनो हो सकते हैं। यह एक संज्ञेय और जमानती अपराध है। इस धारा के अंतर्गत आने वाले अपराध किसी भी मजिस्ट्रेट के समक्ष चलाया जा सकता है। और इस में समझौता नहीं किया जा सकता।



आईपीसी धारा 279 क्या है

धारा 279 – लोक मार्गपर उतावलेपन से वाहन चलाना या हाँकना-

जो कोई किसी लोक मार्ग पर ऐसे उतावलेपन या उपेक्षा वाहन चलायेगा या सवार होकर हाँकेगा जिससे मानव जीवन संकटापन्न हो जाये या किसी अन्य व्यक्ती को उपहात या क्षति कारित होना सम्भाव्य हो, वह दोनो मे से किसी भाँति के कारावास से जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनो से दंण्डित किया जायेगा।



Section 279- Rash driving or riding on public way-

Whoever drives any vehicle, or rides, on any public way in a manner so rash or negligent as to endanger human life, or to be likely to cause hurt or injury to any other person, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to six months, or with fine which may extend to one thousand rupees, or with both.



Classification of Offence:-

  1. Punishment_- Imprisonment for six month or fine rupees 1000/- or both
  2. Cognizable
  3. Bailable
  4. Triable by any magistrate
  5. Non compoundable

धारा 279 में कितनी सजा है?

यह एक सज्ञेय अपराध होने के साथ साथ जमानती अपराध है। इस धारा के अंतर्गत होने वाले अपराध को किसी भी मंजिस्ट्रेट के समक्ष चलाया जा सकता है। इस धारा के अंतर्गत दोषी व्यक्ती को छह महीने तक की जेल की सजा और एक हजार रुपये तक का चालान भी लगाया जा सकता है।



आईपीसी धारा 279 के तहद अपराध शाबित करने के लिए आवश्यक मुद्दे:-

  1. आरोपी अपने वाहन को सार्वजनिक मार्ग पर जल्दबाजी और लापरवाही से चला रह था अथवा सवार हो रहा था।
  2. आरोपी जिस वाहन पर सवार हो रह था अथवा हाक रहा था जिससे मानव जीवन पर कोई संकट अथवा कोई चोट अथवा आघात पहुंचा सकता है।


आरोपी गाड़ी चलाते समय उचित सावधानी से गाड़ी चला रहा था अथवा नही यह देखना बहोत महत्वपूर्ण है। यह कहा जा सकता है कि उस स्थिति में आम आदमी की परवाह किए बिना गाड़ी चलाना मुश्किल है। गलत अनुमान लगाया जाने का मतलब यह नही है के आरोपी लापरवाही से गाडी चला रहा था। ऐसे समय में जब वाहन तेज गति से चला रहा हो, और जब सड़क पर भीड़भाड़ न हो, इसे लापरवाह नहीं कहा जा सकता। हाईवे पर 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार बहुत ज्यादा नहीं है ऐसे स्थिती मे यह निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है कि तेज गति लापरवाही है। ऐसे में अन्य मुद्दोपर भी विचार करने की जरूरत है। 



यदि कोई पैदल चलने वाला यात्री अचानक भागते हुवे सड़क के बीच में रुक जाता है और दुर्घटना हो जाती है, तो ऐसी स्थिती मे वाहन चालक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। ऐसा तब हो सकता है जब ड्राइवर को ब्रेक लगाने और रुकने का मौका न मिले।


इस धारा के तहत आरोपी के खिलाफ अपराध साबित करने के लिए सरकार पक्ष को उपरोक्त मुद्दोको साबित करना आवश्यक है। सिर्फ इसलिए कि एक दुर्घटना हुई तो इसका मतलब यह नहीं है कि आरोपी लापरवाह से गाडी चला रहा था। आरोपी की लापरवाही को अलग से साबित किया जाना चाहिए। इसलिऐ धारा 279 के तहत दायर मामले में फरियाद के गवाहों द्वारा निम्नलिखित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।



चश्मदीद गवाह (Eye witness)

यदि किसी केस में चश्मदीद गवाह हैं, तो उसकी क्रोस एग्जामिनेशन बहोत सोच समज कर कने की आवश्यकता है। अदालत इस एक गवाह को मानते हुए आरोपी को सजा दिला सकती है। इसलिए, ऐसे गवाहों को पुलिस द्वारा दिए गए बयानो को ध्यानपूर्वक अध्ययन करना आवश्यक है।

वारदात कब और कितने तारिख को हुई और गवाह के बयान पुलीस द्वारा कब दर्ज कराया गाय  है। वारदात के मौकेपर गवाह मौजूद रहने का कोई कारण था या यह कैसे या क्यों महज एक संयोग था। वारदात के बाद ऐसे गवाहों के साथ कैसा व्यवहार किया गया? ये सभी मुद्दो को प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य के बयान पर मूल्यांकन करने मे महत्वपूर्ण हैं।

गवाहो के साक्ष्य और उसके बयानों की जांच करने के बाद ही उसका क्रोस एग्जामिनेशल करना आवश्यक है। वारदात आरोपी के लापरवाही के वजाह से हुई है अथवा कोई अंन्य वजाह है ईसके बारेमे फैसला सोच समझकर लेना चाहिऐ। यदि केवल घटना हुई हो लेकिन इसमें आरोपी की लापरवाही नहीं दिखाई गई तो आरोपी को दंडित नहीं किया जा सकता। 



Hearsay evidence / witness:-

वारदात के बारेमे पुरी जानकारी न होते हुवे सिर्फ कही सुनी बातो पर गवाह देने वाले पर कोर्ट यकिन नही करता। इस तरह के गवाहो को Hearsay evidence / witness कहा जाता है। और ऐसे गवाहो के बयानात पर आरोपी को दोषी नही ठहराया जा सकता।


मेडिकल अधिकारी (Medical Officer):-

ऐसे मामलों में अगर कोई व्यक्ति घायल होता है तो कोर्ट में मेडिकल साक्ष्य पेश किया जा सकता है। ऐसे गवाह के क्रोस ऐग्जामिनेशन करने से पहले, मेडिकल सर्टिफिकेट का ध्यानपूर्वक अध्ययन करना आवश्यक है। क्योकी दरअसल, मेडिकल सर्टिफिकेट की ध्यानपूर्वक अध्ययन के हिसाब से डिफेंस कैसे लिया जाएगा यह तय किया जा सकता है। इसके लिए मेडिकल ज्यूरिस्प्रूडेन्स का अभ्यास करना आवश्यक होता है।



दुर्घटना मामले से जुड़े क्रोस ऐग्जामिनेशन के सवालों के नमूने:-

फैक्ट स्टोरी: इस मामले में एक चार पहिया वाहन ने एक राहगीर को टक्कर मार दी और उसे घायल कर दिया. घटना गवाह की दुकान के सामने एक सार्वजनिक सड़क पर हुई और घटना सुबह करीब 11 बजे हुई.


सवालों के नमूने:-

  1. क्या आप अपनी दुकान चलाते हैं?
  2. क्या वारदात के समय आपके किराने की दुकान मे ग्राहकों की भीड़ थी?
  3. सड़क की दिशा में हंगामा होते ही, आप शोर सुनकर उस दिशा में चले गये और क्या उस समय लोगों की भीड़ थी।
  4. भीड़ में लोगो के बातचीत सुनकर आपको समझमे आया कि यह घटना कैसे हुई?
  5. आपने घायल व्यक्ति की मदद करने के लिऐ अस्पताल नहीं ले गए।
  6. घटना के अगले दिन जब पुलिस घटना के बारे में पुछताछ कर रही थी तब आपने पहली बार पुलिस को वाररदात के बारेमे बताया।
  7. आपने वारदात की सूचना पुलिस को नहीं दी।
  8. वारदात वाले दिन पुलिस मौके पर पहुंची थी जब पुलिस ने दोपहर में पंचनामा किया। हालांकि, आपने वारदात की सूचना पुलिस को नहीं दी।
  9. आप पुलिस के कहने के मुताबीक अदालत में झूठ बोल रहे है कि आपने वारदात होते हुवे देखा है।
  10. आपको वारदात के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
  11. आपने भीड़ में मौजूद लोगों को सुनकर वारदात के बारे में बयान दिया है।
  12. आपने आरोपी के खिलाफ झूठी गवाही दी है।


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