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हिंदू विवाह अधिनियम के तहत विवाह विच्छेद | Divorce under section 13 of Hindi Marriage Act 1955 | हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13 के तहत विवाह विच्छेद

हिंदू विवाह अधिनियम के तहत विवाह विच्छेद | Divorce under section 13 of Hindi Marriage Act 1955 | हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13 के तहत विवाह विच्छेद 

Photo by Ketut Subiyanto from Pexels

परिचय

        हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत विवाह विच्छेद से संबंधित प्रावधान किए गए हैं। जिसे अंग्रेजी में Divorce कहा जाता है। इस धारा 13 में विवाह विच्छेदन से संबंधित कानूनी प्रावधान दिए गए हैं। पति अथवा पत्नी इनमेसे कोईभी नीचे दिए गए कारणों से विवाह विच्छेदन के लिए, अदालत मे आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए, कानून के अस्तित्व में आने से पहले अथवा अस्तित्व मे आने के बाद, विवाह हुआ हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। कोई भी पति-पत्नी हो, चाहे उनकी शादी कभीभी हुई हो, वे एक-दूसरे के खिलाफ अदालत में विवाह विच्छेदन के लिए आवेदन कर सकते हैं। वह कैसे कर सकेते है, उसकी जानकारी हम यहापर समझ ने की कोशिश करते है।


अदालत में विवाह विच्छेदन के लिए आवेदन करने के कारण वे निम्नलिखीत इस प्रकार हैं:-

  1. शादी के बाद, यदि पति-पत्नी में से किसी एक व्यक्ति का किसी अन्य व्यक्ति के साथ स्वैच्छिक, अनैतिक शारिरीक संबंध रहा हो।
  2. शादी के बाद, या तो पति या पत्नी में से किसी एक को उसके साथी द्वारा उत्पीड़न किया जाता हो तो, जिसे अंग्रेजी में क्रुयल्टी कहा जाता है। ईसप्रकार की घटना होती हो, तो पति अथवा पत्नी ईनमेसे कोईभी अदालत में विवाह विच्छेदन के लिये आवेदन कर सकते है।
  3. अगर पति-पत्नी ईनमेसे कोईभी बिना किसी कारणके लगातार दो साल या उससे अधिक समय के लिए छोड़ कर चला गया है। और उनमे पति-पत्नी का नाता नही रहा हो, तो पति अथवा पत्नी ईनमेसे कोईभी अदालत में विवाह विच्छेदन के लिये आवेदन कर सकते है।
  4. अगर पति अथवा पत्नी ईनमेसे कोईभी अपने धर्म को त्यागकर दूसरे धर्म में परिवर्तित हो गया है। तो पति-पत्नी ईनमेसे कोईभी अदालत में विवाह विच्छेदन के लिये आवेदन कर सकते है।
  5. यदि पति अथवा पत्नी ईनमेसे कोईभी एक व्यक्ती स्थायी रूप से पागल है, अथवा कभी-कभी पागलपन के दौरे पडते है, अथवा वे एक दूसरे के साथ रहने योग नही है।
अब यहां इस बारे में अधिक खुलासा करनेकी आवश्यक्ता है। वे इस प्रकार हैं:-
  1. अ)  मानसिक बिमारी जैसे दिमागी विकार अथवा मन की विकलांगता इस्तरह किसी भी मानसिक बीमारी को शामिल कर सकते हैं।
    ब) मानसिक विकार मानसिक रोग हैं।
    क) मानसिक दुर्बलता (साइकोपैथिक विकार) यदि पति अथवा पत्नी ईनमेसे कोईभी एक व्यक्ति मानसिक रुपसे पूरी तरह से विकसित व्यक्ति नहीं है, तो उन्हें शामिल किया जाएगा।
  2. यदि पति अथवा पत्नी ईमनेसे एक व्यक्ती ऐसी बीमारी से पीड़ित हैं, जिसके ठीक होने की कोईभी संभावना कम है। (जैसे कुष्ठ रोग जैसी बीमारी)
  3. यहां तक कि अगर सिर्फ छुनेसे बिमारी हो सकती है।, तो इस तरह की बीमारी (उदाहरण के लिए गर्मी और अन्य बीमारियों) का कारण बन सकता है।
  4. यदी पति अथवा पत्नी ईनमेसे कोईभी एक व्यक्ति ने सांसारिक चीजों को त्यागने और एक धार्मिक संप्रदाय में शामिल होने का फैसला किया हो, (उदा. यदी किसीने संसार त्यागकर संन्यास लिया हो।)
  5. यदि पती अथवा पत्नी ईनमेसे कोईभी सात साल से अधिक या सात साल के लिए गुमशूदा हो गये है, और उनके बारे में कोई जानकारी नहीं है।


    इसके अलावा, हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 (1 ए), 13 (2) के तहत भी विवाह विच्छेदन के लिए आवेदन कर सकते है। इसके कारण निम्नलिखीत हैं: -

  1. यदि पति अथवा पत्नी ईनमेसे कोईभी एक व्यक्ती साधारण एक वर्ष या उससे अधिक समय तक एक दुसरे के साथ संभोग नहीं किया है। तब उनमेसे कोईभी विवाह विच्छेदन के लिए आवेदन कर है।
  2. यदि वैवाहिक संबंधों को फिर से स्थापित करने के आदेश के बावजूद भी, पति-पत्नी ने एक वर्ष या उससे अधिक समय वैवाहिक संबंधों को फिर से स्थापित नही किया और उनमे किसी भी प्रकार का शारिरीक संबंध प्रस्तातापीत नही हुवा हो।
  3. अगर पति-पत्नी ईनमेसे कोईभी व्यक्ति की पहली पत्नी या पहले पति जीवित हैं। अथवा उनका तलाख नही हूवा हो।
  4. शादी के बाद, यदि दोनों में से किसी भी पति अथवा पत्नी को अप्राकृतिक संभोग या बलात्कार जैसे अपराध का दोषी ठहराया गया है।


उपरोक्त सभी मामलों में, दोनों पक्षों द्वारा (जिसपर जूल्म हुवा है) तलाक के लिए आवेदन दायर कर सकता है। इसके अलावा, इस अधिनियम की धारा 13 बी के तहत आपसी सहमति के तहत विवाह विच्छेदन के लिए आवेदन किया जा सकता है। आइये उसके बारे में थोड़ा जानते हैं।

पति-पत्नी की आपसी सहमति से विवाह विच्छेदन के लिए आवेदन: -

हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13 बी के तहत, दोनों पक्षों द्वारा आपसी सहमति से विवाह  विच्छेदन के लिए अदालत मे आवेदन कर सकते है। जिसे अंग्रेजी में ‘डायव्होर्स बय म्युचूअल कंन्सेंट’ कहते है। यदि किसी कारण से पति-पत्नी को यह विश्वास हो जाता है कि, उनदोनो के विभक्त मतभेद के कारण वे एक दुसरे के साथ नहीं रह सकते है। और वे इसतरह कम से कम एक वर्ष या उससे अधिक समय तक एक दुसरे के साथ नहीं रह सके हो। और साथ ही उनमे पिछले एक साल से शारीरिक संबंध नहीं हुवा हो, तो वे आपसी सहमति से विवाह विच्छेदन के लिए आवेदन कर सकते हैं।


हालांकि, इस तरह के आवेदन के दाखिल होने के छह महीने पूरा होने तक आवेदन पर विचार नहीं किया जाता है। तत्पश्चात, उचित पूछताछ द्वारा दिए गए बयानों को सत्यापित करने के बाद अदालत द्वारा उनके आवेदन को मंजूरी दे दी जाती है। यह माना जाता है कि, जिस दिन आवेदन पर हुकूम हो जाता है, उस दिन विवाह संपूस्ट मे आजाता है। यदि अदालत का हुकूमनामा पर अपील नहीं कीया गया है अथवा निरस्त कर दी गई है। तो दोनों में से कोई भी पुनर्विवाह कर सकता है। अदालत के हुकूमनामे के विरोध, अपील के लिए दी गई समय सीमा के भीतर पुनर्विवाह ना करना ही बेहतर है।


रिती-रिवाजो के अनुसार विवाह विच्छेदन: -

कुछ जातियों और जनजातियों के लिए धारा 29 (2) के तहत, रिती-रिवाजो के अनुसार किए जाने वाले विवाह विच्छेदन को कानून द्वारा मान्यता दिया गया है। उदा. पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के परंपरा के नूसार विवाह विच्छेदन किया जा सकता है। उन्हें इसे अपनाना होगा। इससे न केवल उनका पैसा बचेगा बल्कि उनका श्रम भी बचेगा।

ईस्तरह से हिंदू विवाह अधिनियम के तहत विवाह विच्छेद के बारेमे हमने समझनेकी कोशीश कि है जो के  हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13 के तहत विवाह विच्छेद ईसके प्रेवधान दिए गए है।


नोट:- एसेही कानूनी जानकारी हिंदी मे पाने के लिए हमारे टेलिग्राम चैनल Law Knowledge in Hindi को Join करे।

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