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विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 | Legal Services Authorities Act, 1987

विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 | Legal Services Authorities Act, 1987



लोगों का आमतौर पर यह मानना होता है कि कोर्ट कचहरी की कारवाई करना यह बडी खर्चीली चिज होती है। कई बार हमारे सामने कई ऐसे सवाल आते है कि क्या संविधान और कानून में कोई ऐसा प्रावधान दिया गाय है जिनके तहत कमजोर वर्ग के लोग भी उचित तरीके से कानूनी लडाई लड सके। इसी बात को समझने के लिए आइए इस लेख के माध्यम से विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 | Legal Services Authorities Act, 1987 क्या होता है इसके बारेमें जानकारी हासिल करने की कोशिश करते है।

मुफ्त कानूनी सेवाएं क्या होती है।

मुफ्त कानूनी सेवाओं का मतलब यह होता है की, उन गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को सिविल और क्रिमिनल मामलों में, किसी भी अदालत की कानूनी कार्यवाई में या न्यायाधिकरण में या एक प्राधिकारी के समक्ष, मुफ्त कानूनी सहायता प्रादान करना होता है।

कानूनी प्रावधान

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39 ए में सभी के लिए न्याय सुनिश्चित किया गया है और गरीबों तथा समाज के कमजोर वर्ग के लिए निःशुल्क कानूनी सहायता की व्यवस्था की गई है। संविधान का अनुच्छेद 14 और 22(1) हर राज्य के लिए अनिवार्य करता है कि वह कानून के समक्ष समानता और एक ऐसी कानूनी व्यवस्था को सुनिश्चित करें जो सभी को समान अवसर के आधार पर न्याय को बढावा दें। समानता के आधार पर समाज के कमजोर वर्गों को सक्षम विधि सेवाएं प्रदान करने के लिए वर्ष 1987 में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम पास किया गया।

नालसा एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA & SLSAs)

  1. इस अधिनियम के तहत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण का गठन किया गया। इसका काम कानूनी सहायता कार्यक्रम लागू करना और उसका मुल्यांकन एवं निगरानी करना है। साथ ही, इस अधिनियम के अंतर्गत कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराना भी इसका काम है।
  2. हर राज्य में. एक राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण का गठन किया गया है। जैसे हियाणा में हरियाणा स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी है और दिल्ली में दिल्ली स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी है।
  3. जिला स्तर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का गठन किया गया है जो हर जिला न्यायालय में स्थित है तथा जिसके अध्यक्ष जिला न्यायाधीश होते है।
  4. इसी तरह तालुका स्तर पर नालसा की नीतियों और निर्देशों को प्रभाव देने के लिए तालुका विधिक सेवा समिति गठित की गई है।

कौन पा सकते हैं कानूनी सेवाएं

  1. महिला और बच्चे
  2. अनुसूचित जाति जनजाति के सदस्य
  3. औद्योगिक कामगार
  4. बडे पैमाने पर आपदा, हिंसा, बाढ, सूखा, भूकंप व औद्योगिक आपदा के पीडित
  5. विकलांग व्यक्ति
  6. हिरासत में व्यक्ति
  7. वे व्यक्ति जिनकी वार्षिक आय1 लाख से अधिक नहीं है।
  8. तस्करी के शिकार मनुष्य या बेकार

निशुल्क कानूनी सेवाओं में क्या शामिल है।

  1. कानूनी कार्यवाही में एक अधिवक्ता द्वारा प्रतिनिधित्व
  2. केस की तैयारी, अपील का ज्ञापन, कानूनी कार्यवाई में मुद्रण और दस्तावेजों का अनुवाद, कागज किताब सहित की तैयारी
  3. कानूनी दस्तावेजों का मसौदा तैयार करना, विशेष अनुमति याचिका आदि
  4. किसी भी अदालत या अन्य प्राधिकारी या न्यायाधिकरण के समक्ष किसी भी मामले या अन्य कानूनी कार्यवाही के संचालन में किसी भी सेवा का प्रतिपादन
  5. किसी भी कानूनी मामले पर सलाह देना

कानूनी सलाह

  1. अगर किसी व्यक्ति को ऐसी कानूनी मदद की आवश्यकता है तो वह अपनी संम्बन्धित अथॉरिटी को संपर्क करें। हरियाणा स्टेट लीगल सर्विसेज का हेल्पलाइन नम्बर है18001802057 तथा दिल्ली स्टेट लीगल सर्विसेज का हेल्पलाइन नम्बर 1516 है।
  2. इसके साथ ही कुछ वकील भी कमजोर तथा जरूरतमंद लोगो को मुफ्त कानूनी सेवाएं प्रदान करते है। जिनको संपर्क किया जा सकता है।

इस लेख के मध्यम से आज हमने हमारे पाठकों को विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 | Legal Services Authorities Act, 1987 के बारेमें जानकारी देनेका प्रयास किया है। आशा है आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। इससे संबंधित आपका कोई सवाल हो ता आप अपना सवाल निचे कमेंट बॉक्स में पुछ सेकते है। इसी तरह कानूनी जानकारी के लिए आप हमारे इस पोर्टल apanahindi.com पर आवश्य व्हिजिट करें।



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