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क्रॉस एफ आई आर क्या होता है? | क्रॉस एफआईआर करने के फायदे क्या है | What is Cross Complaint in Hindi

क्रॉस एफ आई आर क्या होता है? | क्रॉस एफआईआर करने के फायदे क्या है | What is Cross Complaint in Hindi


परिचय

अक्सर हम अखबारों में और न्युज चैनल पर देखते रहते है के फला किसी दो समुह के लोगों में किसी कारण झगडा हुवा और उनमे हातापाई हुई तो ऐसे परिस्थिति मे दोनो पक्ष एक दुसरे पर आरोप लगाते हुवे पुलिस थाने मे परिवाद दर्ज कराते है। और कहानी ऐसे बनाते है के एक पक्ष के और से दुसरे पक्ष पर एफआईआर दर्ज हो जाती है। तब दुसरा पक्ष अपने बचाव के लिए पहले पक्ष पर भी एफआईआर दर्ज करवाती है। जिसे क्रॉस कंप्लेंट या क्रॉस एफआईआर कहते है। आइए इस लेख के माध्यम से हम यह जानने की कोशिश करते है की क्रॉस एफ आई आर क्या होता है? और क्रॉस एफआईआर करने के फायदे क्या है यह जानने की कोशिश करते है।

क्रॉस एफ आई आर क्या होता है?

जब कोई शिकायतकर्ता किसी व्यक्ति पर अथवा किसी व्यक्तियों के समुह पर किसी प्रकार का विवाद को लेकर पुलिस थाने मे एफआईआर रजिस्टर करवाता है और बाद में सामने वाला दुसरा व्यक्ति भी उस शिकायतकर्ता पर अथवा उनके व्यक्तियों के समुह पर उसी विवाद को लेकर एफआईआर रजिस्टर करवाता है तो उसे क्रॉस एफआईआर याने क्रॉस कंप्लेंट कहते है। इसका मतलब यह है की, जब दोनों ही पार्टी एक दूसरे के खिलाफ एक ही विवाद को लेकर एफआईआर करवाते हैं तो उसे क्रॉस एफआईआर याने क्रॉस कंप्लेंट कहते है।

क्रॉस एफआईआर कैसे करें

  1. सबसे पहले पुलिस थाने में लिखित रुप में शिकायत दें। अगर पुलिस लिखित शिकायत पर एफआईआऱ रजिस्टर कर देती है तो ठीक है वरना आप डीएसपी और एसपी स्तर पर लिखित रुपसे शिकायत दें और एफआईआर दर्ज करवाने का अनुरोध कर सकते है। अगर फिर भी एफआईआर दर्ज नहीं होती है तो आप संबंधित कोर्ट में 156(3) की याचिका अपने वकील के माध्यम से दायर करें।
  2. अगर आपके शरिर पर कहीं कोई चोट लगी है तो उसे तुरंत पुलिस को सूचित करे और तुरंत अपना मेडिकल करवाएं तथा एमएलसी कटवाएं। अगर आप पुलिस थाने तक नहीं जा पाते हैं या चोट ज्यादा गहरि है तो सीधे अस्पताल भी जा सकते हैं, क्योंकि अस्पताल में पहुंचने पर प्रशासन खुद ही पुलिस को इस बारे में सूचित करता है।


क्रॉस एफआईआर करने के फायदे क्या है

  1. क्रॉस एफआईआर करने से केस मजबूत बनता है जिससे वकील कोर्ट में केस को ज्यादा बेहतर ढंग से लड सकता है।
  2. क्रॉस एफआईआर से सामने वाली पार्टी पर दबाव बनाया जा सकता हैं कि वह एक तो अपना केस वापस ले या फिर समझौता करें। तो इस दृष्टि से क्रॉस कंप्लेंट वाले मामलों में जादातर समझौता के चांस बढ जाते हैं।


क्रॉस एफआईआर की समय सीमा

वैसे तो क्रिमिनल केस करने के लिए कोई समय सीमा नहीं होती लेकिन फिर भी हमेशा जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करनी चाहिए। अक्सर देरी के मामलों में यह देखा गया है की पुलिस को आरोपी के खिलाफ सबूत जुटाने में परेशानी आती है क्योंकि कंप्लेंट दर्ज कराने के लिए लंबा समय बीत चुका होता है और शिकायत कर्ता औप गवाहों के दिमाग से काफी जरूरी बातें भूल चुके होते है।


कानूनी सलाह

  1. झगडे या मारपीट के मामलों में आप तुरंत मेडिकल अवश्य कराएं तथा एमएलसी कटवाएं। एमएलसी कहां कराई गई है यह भी बहोत अहम हैं। सरकारी अस्पतालों से ही मेडिकल करवाने की कोशिश करें।
  2. झगडे या मारपीट के मामलों में अगर आपको चोट या हानी पहुंची है और सामने वाली पार्टी ने आप पर एफआईआर दर्ज करवा दीया है तो आप क्रॉस एफआईआर अवश्य करवाए।
  3. इस तरह के मामलों में अक्सर देखा गया है कि लोग कानूनी ज्ञान के अभाव में खुद ही अपने केस में कमजोर कडिया बना देते हैं जिससे उन्हे केस के दौरान भारी नुकसान उठाना पडता हैं। इसलिए हर कदम शुरू से ही उचित कानूनी परामर्श के साथ उठाएं।

इस लेख के माध्यम से हमने हमारे पाठको को यह जानकारी देने की कोशिश कि है की क्रॉस एफ आई आर क्या होता है? | क्रॉस एफआईआर करने के फायदे क्या है। आशा है आरको हामारा यह लेख पसंद आया होगा। ऐसे ही कानूनी जानकारी को पाने के लिए आप हमारे इस  पोर्टल apanahindi.com पर आवश्य व्हिजीट करें।



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