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आई.पी.सी. धारा 420 क्या है | What is section 420 of IPC

आई.पी.सी. धारा 420 क्या है | What is section 420 of IPC



धारा 420 यह भारतीय दंड संहिता 1860 मे चाप्टर 17 में दिया गया है। इस धारा के अनुसार, जो कोई भी व्यक्ति किसी भी व्यक्ति को धोखा दे और उसे बेईमानी से किसी भी व्यक्ति को कोई भी संपत्ति देने के लिए, या किसी बहुमूल्य वस्तु या उसके एक हिस्से को, या कोई भी हस्ताक्षरित या मुहरबंद दस्तावेज़ जो एक बहुमूल्य वस्तु में परिवर्तित होने में सक्षम है में परिवर्तन करने या बनाने या नष्ट करने के लिए प्रेरित करता है तो उस अपराधी को किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, और साथ ही आर्थिक दंड से दंडित किया जाएगा। आईये इस लेख के माध्यम से आज हम आई.पी.सी. धारा 420 क्या है | What is section 420 of IPC को समझने की कोशिश करते है।

भारतीय दंड संहिता
धारा 420- छल करना और संपत्ति परिदत्त करने के लिए बेईमानी से उत्प्रेरित करना-

जो कोई छल करेगा, या तद्दवारा उस व्यक्ति को, जिसे प्रवंचित किया गया है, बेईमानी से उत्प्रेरित करेगा कि वह कोई संपत्ति किसी व्यक्ति को परिदत्त कर दे, या किसी भी मुल्यवान प्रतिभूति को या किसी चीज को, जो हस्ताक्षरित या मुद्रांकित है, और जो मुल्यवान प्रतिभूति में संपरिवर्तित किये जाने योग्य है पूर्णतः या अंशतः रच दे, परिवर्तित कर दे, या नष्ट कर दे, वह दोनों सें से किसी भाँति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और वह जुर्माने से भी दंडनीय होगा।


Section 420 in The Indian Penal Code
Cheating and dishonestly inducing delivery of property-

Whoever cheats and thereby dishonestly induces the person de­ceived to deliver any property to any person, or to make, alter or destroy the whole or any part of a valuable security, or anything which is signed or sealed, and which is capable of being converted into a valuable security, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.


Classification of Offence

  1. Punishment – Imprisonment for 7 years and fine.
  2. Cognizable.
  3. Non-bailable
  4. Triable by JMFC
  5. Compoundable with permission of the court before which any prosecution of such offence is pending.

टिप्पणी:-

  1. इस धारा के तहत अनुबंध का उल्लंघन अपराध नहीं बनता है। (1985(2)Crime394)
  2. आरोपी की मंशा क्या थी, यह उसके कार्यों और व्यवहार से जाना जा सकता है।
  3. जिस समय लेन-देन होता है या घटना होती है, उस समय आरोपी का धोखा देने का इरादा होना चाहिए।
  4. ठगी में आरोपी की मंशा बेईमानी की थी, इसकी पुष्टि की जानी चाहिए।
  5. वादे निभाने में विफल हनो जरूरी नहीं है कि यह कार्य हर बार अपराध हो। (1982Cr.L.J.2266)
  6. यदि अभियुक्त अपने बेटे की शादी तय करते समय उसकी बहुत तारीफ करता है लेकिन यह छुपाता है कि वह मानसिक रूप से बीमार है तो वह इस धारा के तहत दोषी है। (1987Cr.L.J.1315)
  7. मात्र चेक बाउंस होता है तो वह इस धारा के तहत अपराध नहीं है।
  8. यदि खाता बंद होने के कारण चेक बिना भुगतान के लौटा दिया जाता है, तो यह इस धारा के तहत अपराध नहीं बनता है।

क्रॉस एग्जामिनेशन / जरह के लिए नमूना प्रश्न-

कंप्लेनंट द्वारा आरोपी का घर खरीदने के लिए आरोपी से डील की। घर की कीमत 10 लाख रुपए मे करने का सौदा हुवा। जिसमें से कंप्लेनंटने एक लाख रुपए एडवांस के रूप में अदा कर दिए। इसके बाद एक माह के भीतर खरीदी करने का निर्णय लिया गया। लेकिन आरोपी ने बहाना बनाकर देरी करने लगा और मना कर दिया। कंप्लेनंटने धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए आरोपी के खिलाफ एक निजी शिकायत दर्ज कराई। ऐसे मामले में अभियुक्त द्वारा अभियोजन पक्ष से क्रॉस एग्जामिनेशन / जरह –
  1. आपके और आरोपी के बीच मकान खरीदने को लेकर लिखित समझौता हुआ था। यह आरोपी के कहने पर पंजिकृत किया गया था।
  2. आरोपी और आपके बीच दोस्ताना संबंध थे।
  3. समझौता करते समय आरोपी आपको मकान का कब्जा देने को तैयार हो गया था, लेकिन आपने कहा कि खरीद के समय आप कब्जा कर लेने वाले हैं।
  4. समझौते के बाद आरोपी और उसके परिजनों के बीच मकान के मालिकाना हक को लेकर विवाद शुरू हो गया इस कारण आरोपी खरीदी का दस्त नहीं कर सका।
  5. आरोपी ने लिखित पत्र के माध्यम से आपको उक्त तथ्य की जानकारी दी और लेनदेन रद्द करने के लिए सूचित किया।
  6. आपको वह पत्र मिला लेकिन आपने उसका जवाब नहीं दिया।
  7. आरोपी ने आपसे ली गई एक लाख रुपये की राशि वापस करने की इच्छा और तत्परता जाहिर की थी।
  8. समझौते के बाद विवादित संपत्ति वाले इलाके में संपत्तियों के दाम अचानक आसमान छू गए।
  9. संपत्ति को लेकर हुए विवाद के कारण आरोपी संपत्ति की वैधानिक खरीद आपके हक्क में नहीं कर सका।
  10. लेकिन आप आरोपी की बात सुने बगैर खरीदारी करने की जिद कर रहे थे।
  11. संपत्ति के दाम बढ़ने के कारण आरोपित ने खरिदी देने से इंकार कर दिया है, इस तरह के गलतफहमी पर आपने उसके खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज की है।
  12. आरोपी का इरादा आपको धोखा देने का नहीं था।
  13. आपने आरोपी के विरुद्ध स्पेसिफिक परफोर्मंस ऑफ कॉन्ट्रैक्ट करने के लिए दीवानी वाद दायर नहीं किया है।
  14. आपके और आरोपी के बीच का विवाद दीवानी प्रकृति का है।
  15. आपने आरोपी पर दबाव बनाने के लिए उसके खिलाफ झूठा मामला बनाया है।

न्यायनिवाडे / केस लॉ

  1. 2018 All MR (Cri) 1050
  2. 2018 (1) B.C.R. (Cri) 49
  3. 2018 (1) Mah. L.J. (Cri) 599


इस लेख के माध्यम से आज हमने हमारे पाठकों को आई.पी.सी. धारा 420 क्या है | What is section 420 of IPC आशा है आपको यह लेख पसंद आया होगा। इसी तरह कानूनी जानकारी पढने से लिए और सिखने के लिए आप हमारे इस पोर्टल apanahindi.com पर आवश्य भेट दें।



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