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थर्ड पार्टी इंश्योरेंस क्या है? | Third Party Insurance kya hai

थर्ड पार्टी इंश्योरेंस क्या है? | Third Party Insurance kya hai


मनूष्य जीवन में बहोत से सडक दूर्घटनाए होती रहती हैं। इन दुर्घटनाओं से होने वाले नुकसान को इंश्योरेंस कंपनी द्वारा मुआवजा दिया जाता है। तो यह थर्ड पार्टी इंश्योरेंस क्या है? | Third Party Insurance kya hai इसके बरे में  सभी को जानना जरूरी है। आइए आज हम इस थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के बारे में जानने की कोशिश करते है।

भारत देष में प्रति वर्ष लाखों की संख्या में सडक दुर्घटनाएं जैसे मामले होते है, फिर भी लोग अपने वाहन के इंश्योरेंस करवाने को गंभीरता से नहीं लेते है, क्योंकि देखाजाए तो ज्यादातर लोग इंश्योरेंस से होने वाले लाभ और बचत से अनजान होते हैं। इससे जुडा यह विषय है, वह थर्ड पार्टी इंश्योरेंस है, जिसके बारे में लोगों में काफी कम जागरूकता है जब कि भारत में सडकों पर चलने वाले सभी वाहनों के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस करवाना अनिवार्य है।

थर्ड पार्टी इंश्योरेंस क्या है? (Third Party Insurance kya hai)

यह थर्ड पार्टी इंश्योरेंस वह इंश्योरेंस होता है जिस में पॉलिसी का लाभार्थी वह व्यक्ति होता है जो के पॉलिसी में शामिल दोनों पार्टीयों जैसे वाहन का मालिक और इंश्योरेंस कंपनी इनके अलावा कोई तीसरा पक्ष होता है। यदि वाहन से कोई एक्सीडेंट हो जाता है और किसी व्यक्ति को उससे कोई हानी होती है या कोई चोट पहुंचती है या उसकी दुर्घटना से मृत्यु हो जाती है या किसी के संपत्ति को कोई नुकसान पहुंचता है तो उस परिस्थिति में मुआवजे का वित्तीय बोझ इंश्योरेंस कंपनी उठाती है, न कि पॉलिसि होल्डर। सरल भाषा में कहे तो थर्ड पार्टी इंश्योरेंस वाहन के मालिक से जादा दूसरे लोगों के लिए और उनकी संपत्ति को होने वाले नुकसान को कवर करता है।


यह थर्ड पार्टी इंश्योरेंस मे इंश्योरेंस कंपनी वाहन मालिक को भविष्यमे होने वाले आर्थिक नुकसान को प्रोटेक्शन देने का काम करता है। यदि कोई वाहन से कोई दुर्घटना होती है और उस वाहन पर इंश्योरेंस कराया होता है तो पिडीत व्यक्ति को इंश्योरेंस कंपनी द्वारा मुआवजा दिया जाता है और अगर इंश्योरेंस नही किया गया हो तो वाहन के मालिक से मुआवजा वसूल किया जाता है। तो वाहन का इंश्योरेंस करवाना बहोत जरूरी होता है। 


किसीका कोई वाहन इस्तेमाल के लिए लेने या या दुसरे को अपना वाहन इस्तेमाल के लिए देने से पहले यह जान लें

  1. अगर बिना इंश्योरेंस वाले वाहन से कोई एक्सीडेंट हो जाता है और उस एक्सीडेंट से किसी व्यक्ति का मृत्यू होता है या किसी के संपत्ति को नुकसान पहुंचता है तो कोर्ट द्वारा उस वाहन को चलाने वाले व्यक्ति को और उस वाहन के मालिक दोनों को ही उसका जिंम्मेदार माना जाएगा और पीडित व्यक्ति को उसका मुआवजा देने के लिये आदेश दिया जाएगा।
  2. अगर आपने अपना बिना इंश्योरेंस किया हुवा वाहन किसी दुसरे व्यक्ति को चलाने के लिए दे दिया और उस व्यक्ति से कोई एक्सीडेंट हो जाता है तो बात ध्यान में रखें की उस वाहन का मालिक होने के नाते आपको को भी MACT (मोटार एक्सीडेंट क्लेम ट्रैबूनल) के कोर्ट में पीडित व्यक्ति को मुआवजे का हिस्सा देना पडेगा।
  3. अगर आपके व्वारा अपने काम के लिए किसी व्यक्ति से कोई वाहन लिया जाता है जिसका इंश्योरेंस नहीं किया गया हैं और आप से कोई एक्सीडेंट हो जाता है तो आपको को भी MACT कोर्ट में पीडित व्यक्ति को मुआवजे का हिस्सा देना पडेगा।


सेकेंड हैंड वाहन खरिदने पर इंश्योरेंस पॉलिसी का ट्रांसफर कराने से पहले सावधानीयया

  1. यह अक्सर देखा जाता है कि जब कोई व्यक्ति सेकंड हैंड वाहन खरीदता है तब वह उस वाहन का RC ट्रांसफर नही कराते है। यह बात ध्यान में रख लें कि इस दौरान अगर आपसे कोई एक्सीडेंट हो जाता है तो माननिय सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार इंश्योरेंस कंपनी से थर्ड पार्टी कवर तो बरकरार रहता है परंतु आप अपने वाहन के होने वाले डैमेज के लिए कोई क्लेम इंश्योरेंस कंपनी से नहीं मांग सकते क्योंकि इंश्योरेंस पॉलिसी आपके नाम ट्रांसफर हुई नही है और पुराना मालिक इसलिए क्लेम नही कर सकता क्योंकि वह अब वाहन का मालिक नहीं है। तो जब भी कोई वाहन खरीदने पर आरसी ट्रांसफर कराने की फाइल लगाने के साथ ही इंश्योरेंस पॉलिसी को अपने नाम ट्रांसफर करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दें।
  2. ध्यान दें कि सेकंड हैंड वाहन खरीदते समय हर बार यह जरूरी नहीं है कि आप नई इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदें। पुरानी वैलिड पॉलिसी को अमने नाम ट्रांसफर कराने से आप उस पुरानी पॉलिसी का भी लाभ उठा सकते हैं जब तक वह वैलिड है और नई पॉलिसी के खर्चे से भी बच सकते हैं। इंश्योरेंस पॉलिसी को ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया सरल है और इसमें ज्यादा समय भी नहीं लगता।


कानूनी सलाह

  1. यह अनुमान बिल्कुल ना लागाएं कि इंश्योरेंस बस चालान से बचने के लिए करवाना होता है। जबकि सही इंश्योरेंस पॉलिसी कराने से आपके द्वारा किसी दुर्धटना होने पर या आपका वाहन चोरी हो जाने  पर न केवल आपको वित्तीय नुकसान से बचाया जाता है बल्कि दुर्घटना में पीडित व्यक्ति को दिए जाने वाले मुआवजे से भी आपको कवर करती है।
  2. अगर आप कभी अपने किसी काम के लिए दुसरों का वाहन लेकर जा रहे हैं तो यह अवश्य जांच कर लें कि उसके वाहन का इंश्योरेंस किया गया है या नहीं क्योंकि किसी अनचाही दुर्घटना के होने पर आपको भी कोर्ट में भारी-भरकम मुआवजा देना पड सकता है।
  3. जब भी आप अपना कोई वाहन बेच रहें है तो हमेंशा पक्के कागजों के साथ हि बेंचे। अगर आपने अपना कोई वाहन बिना किसी लिखित कागज के किसी व्यक्ति को बेच दिया है और उस वाहन का (बिना इंश्योरेंस) से कोई दुर्घटना हो जाती है तो याद रखें कि MACT कोर्ट में आपको भी मुआवजा भरना पड सकता है क्योंकि कागजों के हिसाब से तो आप ही मालिक हैं। ऐसे मामलों मे हमने कई बार देखा है कि जो नया मालिक है वह मुआवजे से बचने के लिए कोर्ट में अपनी बात से मुकर जाता है कि उसने दुर्घटना वाला वाहन कभी खरीदा गया था।


इस लेख के माध्यम से हमने हमारे पाठको को थर्ड पार्टी इंश्योरेंस क्या है? | Third Party Insurance kya hai और साथ ही किसीका कोई वाहन इस्तेमाल के लिए लेने या या दुसरे को अपना वाहन इस्तेमाल के लिए देने से क्या होता है और सेकेंड हैंड वाहन खरिदने पर इंश्योरेंस पॉलिसी का ट्रांसफर कराने से पहले सावधानीयया क्या बरतने के बारमे जानकारी देने का प्रयास किया है। अगर आपको यह लेख पसंद आया हो तो हमारे एसे ही कानूनी जानकारी पढने के लिए आप हमारे इस पोर्टल apanahindi.com पर आवश्य व्हिजीट करते रहे।






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