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आई.पी.सी. धारा 326 क्या है | I P C Section 326 | आई.पी.सी. धारा 320:- घोर उपहति

आई.पी.सी. धारा 326 क्या है | I P C Section 326 | आई.पी.सी. धारा 320:- घोर उपहति


आई.पी.सी. धारा 326 क्या है | 

यदी कोई व्यक्ती किसी दुसरे व्यक्ती को घातक हथियार से गंभीर रूप से घायल कर देता है तो उसपर भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा-326 के तहत शिकायत दर्ज हो सकता है। जैसे की वह व्यक्ती किसी को चाकू मारता है अथवा उसका कोई अंग को काट देता है या उसे ऐसा जख्म देता है जिस जख्मा के वजाह से उस व्यक्ती की जान को खतरा हो सकता है। इसतरह के अपराध इसी घारा के अंतरगत आते हैं। 


यदी कोई व्यक्ती किसी व्यक्ती के साथ मार-पीट कर के उस व्यक्ती की कोई हड्डी या दांत तोड़ देता है तो भी उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा-326 के तहत ही शिकायत किया जा सकता है। इस घारा के अंतरगत आनेवाले अपराध यह गैरजमानती और गैर समझौतावादी अपराध होते है है। यदी ईस अपराध मे दोषी पाए जाते है तो आरोपी को 10 साल की कैद अथाव उम्रकैद की भी सजा हो सकती है।


धारा 326 के अनुसार:- खतरनाक आयुधों या साधनों द्वारा स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना-

“उस दशा के सिवाय, जिसके लिए धारा 335 में उपबंध है, जो कोई असन, वेधन या काटने के किसी उपकरण द्वारा या किसी ऐसे उपकरण द्वारा, जो यदि आक्रामक आयुध के तौर पर उपयोग में लाया जाए. तो उससे मृत्यु कारित होना सम्भाव्य है, या अग्नि या किसी तप्त पदार्थ द्वारा, या किसी विष या संक्षारक पदार्थ द्वारा, या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा, या किसी ऐसे पदार्थ द्वारा, जिसका श्वास में जाना या निगलना या रक्त में पहुंचना मानव शरीर के लिए हानिकारक है, या किसी जीवजन्तु द्वारा स्वेच्छया घोर उपहति कारित करेगा, वह [आजीवन कारावास] से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा “।

Section 326 Voluntarily causing grievous hurt by dangerous weapons or means-

Whoever, except in the case provided for by section 335, voluntarily causes grievous hurt by means of any instrument for shooting, stabbing or cutting, or any instrument which, used as a weapon of offence, is likely to cause death, or by means of fire or any heated substance, or by means of any poison or any corrosive substance, or by means of any explosive substance, or by means of any substance which it is deleterious to the human body to inhale, to swallow, or to re­ceive into the blood, or by means of any animal, shall be pun­ished with 1[imprisonment for life], or with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.


Classification of offence:-

1) Punishment – Imprisonment for life or imprisonment for  years and fine
2) Cognizable
3) Non-bailable
4) Non-Compoundable
5) Triable by Judicial Magistrate first Class

इस धारा 326 के तहत अपराध साबित करने के लिए, सरकार पक्ष का यह दायित्व है कि वह निम्नलिखित कारकों को साबित करे।

  1. आरोपी ने शिकायत कर्ता को गंभीर रूप से घायल कर दिया है।
  2. आरोपी ने जानबूझकर शिकायतकर्ता को गंभीर रूप से घायल किया है।
  3. आरोपी द्वारा की गई गंभीर चोट किसी घातक हथियार या वस्तु से की गई है।


यदि सिर पर कुल्हाड़ी से वार किया जाए और उससे होने वाला घाव आधा इंच गहरा हो, तो उस जखम से जान जाने का खतरा है एसे माना जा सकता है, और आरोपी को धारा 326 के तहत उस कार्य के लिए दोषी पाया जा सकता है।

यदि कोई कंप्लेन्ट को गंभीर चोट पोहची है और सरकार पक्ष द्वारा खून से सने कपड़े पेश नहीं किया जाता है, तो इसी एक वजाह से केस पा कोई प्रभाव नहीं होता है।

भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 326, मे विभिन्न प्रकार के हथियारों और उपकरणों का उल्लेख किया गाय है। उसका अध्ययन किया जाना चाहिए।

आई.पी.सी. धारा 320:- घोर उपहति

भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 320 मे कुछ प्रकार की चोटों को जबरन चोट याने के घोर कहलाती है वे निम्नानुसार है।

  • पहला -  पुंस्त्वहरण ।
  • दूसरा - दोनों में से किसी भी नेत्र की दृष्टि का स्थायी विच्छेद ।
  • तीसरा - दोनों में से किसी भी कान की श्रवणशक्ति का स्थायी विच्छेद ।
  • चौथा - किसी भी अंग या जोड़ का विच्छेद ।
  • पांचवां - किसी भी अंग या जोड़ का की शक्तियों का नाश या स्थायी ह्रास ।
  • छठा - सिर या चेहरे का स्थायी विद्रूपिकरण ।
  • सातवां - अस्थि या दांत का भंग या विसंधान |
  • आठवां - कोई उपहति जो जीवन को संकटापन्न करती है या जिसके कारण उपहत व्यक्ति बीस दिन तक तीव्र शारीरिक पीड़ा में रहता है या अपने मामूली कामकाज को करने के लिए असमर्थ रहता है ।


टिप्पणीः-

  1. उस्तरा या चाकू से चेहरे पर वार करने से चेहरा हमेशा के लिए खराब याने विदृप हो जाएगा। इसलिए इस्तरह के चोटे इसी धारा के अंतर्गत आती है।
  2. एक शुद्ध घायल व्यक्ति 20 दिनों तक काम पर नहीं जा सका सिर्फ इसलिए कि वह अस्पताल में था इसका मतलब यह नहीं है कि वह अपना रोज के सामान्य काम करने में असमर्थ था। अधिकांश समय एक व्यक्ति 20 दिनों से भी कम समय में अपना नियमित काम करना शुरू कर देता है, लेकिन अगर उसे पूरे इलाज के लिए अस्पताल में रहना पड़ता है तो अपराध इस धारा के अंतर्गत आता है।
  3. यदि सिर पर कुल्हाड़ी से प्रहार किया जाए और घाव 2 से 3 इंच गहरा हो, तो वह घाव जीवन के लिए खतरा है।
  4. यदि कोई कंप्लेन्ट को गंभीर चोट पोहची है और सरकार पक्ष द्वारा खून से सने कपड़े पेश नहीं किया जाता है, तो इसी एक वजाह से केस पा कोई प्रभाव नहीं होता है।
  5. अगर जान लेने के इरादे से गंभीर चोट पहुंचाई गई हो तो कठोर शिक्षा दी जानी चाहिए।


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