बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 | Child Labor (Prohibition and Regulation) Act 1986
यह कानून बच्चोंको मजदूरी करने के लिए रोकता है। इस कानून के अनुसार वह व्यक्ती बच्चा है जिसकी उम्र 14 वर्ष से कम है और वह व्यक्ती किशोर है, जिसकी आयु 14 वर्ष से अधिक है और वह 18 वर्ष से कम है। यह अधिनियम भारत की संसद और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा 23 दिसंबर 1986 को अधिनियमित किया गया है। इस अधिनियम को बनानेका उद्देश यह है की कुछ रोजगारों में बच्चों की नियुक्ति को प्रतिबंधित करना और कुछ रोजगारों में बच्चों के कार्य की शर्तों को विनियमित करना यह है। आईये इस लेख के माध्यम से बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 | Child Labor (Prohibition and Regulation) Act 1986 क्या है इसके बारेमें संपुर्ण जानकारी हासिल करते है।
बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 क्या है
बाल श्रम एक सामाजिक बुराई है जो एक समाज के एक कमजोर वर्ग की गरीबी व अशिक्षा से जुडी है। प्रसिध्द जर्मन विध्दान मैक्स मूलर ने कहा है कि, “पश्चिम में बच्चे दायित्व समझे जाते है जब कि पूर्व में बच्चे सम्पत्ति.” यह कथन भारत के संदर्भ में शत—प्रतिशत सही है। 14 वर्ष के कम उम्र के बच्चे जो नियोजित है उन्हे बाल श्रमिक कहा जाता है जिनके हित संरक्षण हेतु बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 बनाया गया है जिसकी धारा—3 के अंतर्गत अधिसूचित खतरनाक क्षेत्रों में बाल श्रमिक नियोजन पूर्णतः प्रतिबंधित है जो मुख्यतः निम्न है:-
- बीडी बनाना, तंम्बाकू प्रशंसकरण
- गलीचे बुनना
- सीमेंट कारखाने में सीमेंट बनाना या थैलों में भरना
- कपडा बुनाई, छपाई या रंगाई
- माचिस, पटाखे या बारूद बनाना
- अभ्रक या माईका काटना या तोडना
- चमडा या लाख बनाना
- साबुन बनाना
- चमडे की पीटाई, रंगाई या सिलाई
- उन की सफाई
- मकान, सडक, वाहन व पैक बनाना
- स्लेट पेंसिल बनाना व पैक करना
- गुमेंद की वस्तुएं बनाना
- मोटर गाडी वर्कशॉप व गैरेज
- ईंट भट्ठा व खपरैल
- अगरबत्ती बनाना
- आटोमोबाईल मरम्मत
- जूट कपडा बनाना
- कांच का सामान बनाना
- जलाऊ कोयला और कोयला इंट का निर्माण
- कृषि प्रक्रिया में ट्रैक्टर या मशीन में उपयोग
- कोई ऐसा काम जिसमें शीसा, पारा, मैगनीज, क्रोमियम, अगरबत्ती, वैक्सीन, कीटनाशक दवाई और ऐसबेस्टस जैसे जहरीली धातू व पदार्थ उपयोग में लाये जाते है,
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10 अक्टूबर 2006 से बच्चों को घरेलू नौकर तथा ढाबों आदि में कार्य करने पर प्रतिबंध:-
सरकार द्वारा निर्णय लिया गया है कि बच्चों के रोजगार (बालश्रम) को निम्न क्षेत्रों में जैसे घरेलू लौकर, ढाबा (सडक किनारे) होटल मोटल, टाय की दुकान सैरगाह, पिकनिक के स्थानों पर प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस प्रतिबंधित को बालश्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के अंतर्गत 10 अक्टूबर 2006 से लागू किया गया है।
गैर खतरनाक क्षेत्रों में बाल श्रमिक कार्य कर सकते हैं परंतु निम्न प्रावधानों का पालन किया जाना अनिवार्य है:-
- बच्चों से 6 धंटे से अधिक समय तक काम नहीं कराया जा सकता है।
- एक साथ तीन घंटों से ज्यादा उनसे काम नहीं किया जा सकता है।
- रात के 7 बजे से लेकर सुबह 8 बजे के बीच में उनसे कोई भी काम नहीं लिया जा सकता।
- सप्ताह में उन्हे कम से कम एक दिन छुट्टी दी जानी चाहिए।
सबसे अच्छा तो यह है कि बच्चों को किसी काम पर रखा ही नहीं जाये क्यों कि इससे उनके सेहत पर बुरा असर पडता है और शारीरिक व नामसिक विकास प्रभावित होता है। उन्हे पढने का मौका भी नहीं मिल पाता है। बचपन तो खेलने खाने और पढने के लिए होता है। हर बच्चे को उनके यह अधिकार दिलाया जाना चाहिए। 06 से 14 वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा प्राप्त करना संविधान के अनुच्छेद 21 ए के तहत मौलिक अधिकार है तथा माता पिता व संरक्षक का अनुच्छेद 51 क भारतीय संविधान के तहत 06 से 14 वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा दिलाया जाना मौलिक कर्तव्य है। अतः अधिकार एवं कर्तव्य का अनिवार्य रुप से पालन होना चाहिए।
बाल श्रम केवल कानून से दूर नहीं किया जा सकता है। बाल श्रम के विरूध्द संघर्ष में कोई भी समाज सेवी व्यक्ति या संगंठन निम्नानुसार सकारात्मक योगदान प्रदान कर सकता है:-
- जनता के बीच इस समस्या के प्रति जागरूकता बढाना।
- यह मांग करना कि सरकार विश्व व्यापार संगठन जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों एवं निकायों में बाल श्रम के उन्मूलन के लिए सघन कार्यवाही की जरूरत का मुद्दा उठाये।
- विश्व व्यापार संगठन के ढांचे के अंतर्गत किये गये करारों सहित अंतर्राष्ट्रीय व्यापार करारों में उस सामाजिक खण्ड के आह्वान का सक्रिय (समर्थन) विरोध करना। जिसे सीधे रुप में बाल श्रम के साथ जोडा गया है।
- सरकार से मांग करना कि ऐसी नीति अपनाये जो विकासशील देशों में आर्थिक पुनः संरचना कार्यक्रमों को प्रभावित करने वाली हो। ताकि वे शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य ऐसी सेवाओं को नकारात्मक रुप से प्रभावित न करें जिन पर परिवार व बच्चे विशेष रुप से आश्रित है।
- मांग करना कि निर्णायक अतर्राष्ट्रीय कार्यवाही सुनिश्चित की जावे और आवस्यक होने पर संबंधित सरकारों पर कठोर प्रतिबंध लगाये जाये ताकि बाल श्रम पर तुरंत प्रतिबंध लगाने और उनके उपर हो रही ज्यादतियों को रोकने के लिए विवश हो सके।जि कार्यों में बच्चों का शारीरिक अथवा मानसिक विकास खतरे में है उन्हे रोकने के उपाय करने के लिए विवश हो सके। जि कार्यों में बच्चों का शारीरिक अथवा मानसिक विकास खतरे में है उन्हे रोकने के उपाय करने के लिए विवश हो सके।
- ऐसी विकास सहायता परियोजनाओँ के कार्यन्वयन की मांग करना जिनके प्रत्यक्ष प्रयोजन निर्धनता दूर करना, वयस्क रोजगार को बढाना, शिक्षा के पहुंच में सुधार करना और अन्य दशाओं को प्रभावित करना हो ताकि बाल श्रम को सीमित और अन्ततः उसका उन्मूलन किया जा सके।
- उन देशों के विकास और सहायता परियोजनाओं का कार्यन्वयन करना और उनका समर्थन करना जो बाल श्रम के विरुध्द संघर्ष में अपना योगदान देना चाहनते है। जिससे उनकी ट्रेड यूनियनों की क्षमताओं में सुधार आ सके।
- अपनी घरेलू बाजारों में बाल श्रमिकों द्वारा नियमित समान की खरीद व वितरण पर प्रतिस्पर्धा के एक घटक के रुप में बाधा उत्पन्न करके बाल श्रम के इस्तेमाल को अधिक कठिन बनाना अन्ततः इसके इस्तेमाल को असंभव बना देना।
- एक प्रभावी दबाव के समूह के रुप में कार्य करना।
- राज्य और जिला स्तर पर बाल श्रम प्रकोष्ट स्थापित करना।
- अपने समस्त करारों और कार्ययोजनाओं में बाल श्रमिकों का मुद्दा शामिल करना।
- बाल श्रमिकों के स्थान पर वयस्कों को काम दिये जाने पर जोर देना और व्यावसायिक शिक्षा, पोषाहार, स्वास्थ्य एवं मनोरंजन का समर्थन करना।
- बाल श्रम कार्यक्षेत्रों का अध्ययन और विश्लेषण करना और बाल श्रम को प्रभावित करने वाली नीतियों का समर्थन करना जिससे वैकल्पिक रणनीति बनाने में सहयोग मिले।
- बाल श्रम के बारे में सूचना का प्रचार करना।
- बाल श्रम दिवस मनाये जाने का आह्वान करना।
- ऐसी परियोजनाये शुरू करना जिनकी आवश्यकता बाल श्रम के समस्या वाले क्षेत्रों में महसूस की जा रही है और इस समस्या को हल करने में सहयोग देना।
- अधिक अनुभव होने के कारण जमीनी हकीकत के अधिक निकट सरकार के प्रवर्तन—तंत्र के आंख कान की तरह काम करना।
- क्षेत्र में लगे अपने सदस्यों (खास करके जो बाल श्रम बहुल क्षेत्रों में लगे हुए) को बाल श्रम को समस्त करने संबंधी कानूनों की जानकारी प्रदान करना।
- समस्या और उससे जुडे कानूनों के बारे में बताना ताकि सजग प्रहरी के रुप में अधिक दक्षता पूर्वक कार्य किया जा सके।
- अपनी खुद की कार्यान्मुख परियोजनाएं और कार्यक्रम चलाना।
वव्यक्तिगत रुप से बाल श्रम के विरुध्द संघर्ष में निम्नानुसार सहयोग प्रदान किया जा सकता है:-
- कार्यकर्ता अपने घर में किसी बच्चे को काम पर न रखें।
- अपने साथी कार्यकर्ताओँ को बाल श्रमिक न रखने की सलाह दें।
- अन्य ट्रेड यूनियनों के कार्यकर्ताओं को बाल श्रमिक को काम करने से रोकने की कोशिश करें।
- मजदूर कालोनी में मजदूरों के घर में बाल श्रमिकों को काम करने से रोकने की कोशिश करें।
काम करने के स्थान पर:-
- कार्यकर्ता जाहां काम कर रहा है उस स्थान पर किसी भी बाल श्रमिक को काम पर न लगाने की सलाह प्रबंधकों को दे सकता है।
- कारखानों की कैटीनों में काम करने वाले बाल श्रमिकों को काम करने से रोकने के लिए अपने ट्रेड यूनियनों में सक्रिय भूमिका अदा कर सकता है।
- कार्य स्थल पर ठेकेदार द्वारा किये जाने वाले कार्यों के लिए, जिसमें अधिकातर बाल श्रमिक काम करनते है यूनियन के माध्यम से किये जाने वाले एग्रीमेंट में बाल श्रमिकों को काम पर न रखने की शर्त को शामिल करवा सकता है।
- अपने कार्यस्थल पर प्रबंधकों को बाल श्रम मुद्दों पर संवेदनशील बनाने की कोशिश कर सकता है।
आज हमने इस लेख के माध्यम से हमारे पाठकों को बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 | Child Labor (Prohibition and Regulation) Act 1986 क्या है। इसेक बारेमें जानकरी देनेका पुरा प्रयास किया है। आशा है आपको यह लेख पसंद आया होगा। इसी तरह कानूनी जानकीर सिखने के लिए आप हमारे इस पोर्टल apanahindi.com पर आवश्य भेट दें।
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