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जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कैसे करते है? | How to register in GST in Hindi?

जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कैसे करते है? | How to register in GST in Hindi?



किसी भी देश के टैक्स सिस्टम में टैक्स पेयर्स की पहचान के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना सबसे बुनियादी आवश्यकता है। जीएसटी कानून के तहत व्यवसाय के रजिस्ट्रेशन का अर्थ सरकार की ओर से टैक्स एकत्र करने के लिए संबंधित टैक्स ऑफिसर से टूनिट नंबर प्राप्त करना यह होता है। एक जीएसटी नंबर (GSTIN) 15 अंकोका अल्फान्यूमेरिक आइडेंटिफिकेशन नंबर होता है, जिसमें पहले दो अंक राज्य के कोड को दर्शाता है, अगले दंस अंक पैन नंबर को दर्शाता है, तेरहवा अंक एक ही पैन के तहत एक राज्य के भीतर फर्म द्वारा किए गए रजिस्ट्रेशन की संख्या पर आधारित होता है, अगला अंक Z डिफॉल्ट होता है और अंतिम अंक चैक कोड होता है। GST में रजिस्ट्रेशन के बिना, कोई व्यक्ति न तो अपने ग्राहकों से टैक्स की मांग कर सकता है और न ही उसके द्वारा भुगतान किए गए टैक्स के किसी इनपूट टैक्स क्रेडिट का दावा कर सकता है। इसलीए हर व्यापारी को जीएलटी में रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है। आईये इस लेख के माध्यम से आज हम जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कैसे करते है? | How to register in GST in Hindi? इसके बारेमें जानकारी हासिस करते है।



जीएसटी में रजिस्ट्रेशन करवाना एक टैक्स पेयर को क्या लाभ प्रदान करता है।

  1. उसे कानूनी रूप से माल या सेवाओ के सप्लायर के रूप में मान्यता प्राप्त होती है।
  2. एक नंबर आपको ई-कॉमर्स के माध्यम से उत्पादों को ऑनलाइन बेचने की अनुमति देता है।
  3. वह अपने ग्राहकों से टैक्स वसूल करने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत है और खीददारों को की गई वस्तुओं या सेवाओ पर भुगतान किए गए करों के क्रेडिट को पास करता है।
  4. वह भुगतान किए गए टैक्स के इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर सकता है और उसका उपयोग वस्तुओं या सेवाओं की सप्लाई पर देय करों के भुगतान के लिए कर सकता है।
  5. राष्टीय स्तर पर सप्लायर से प्राप्तकर्ताओं तक इनपुट टैक्स क्रेडिट का निर्बाध प्रवाह होता है।


रजिस्ट्रेशन करना किसके लिए आवश्यक होता है

  1. जीएसटी सप्लाई की स्थिति पर टैक्स होता है, प्रत्येक सप्लायर को रजिस्ट्रेशन कर लेने की आवश्यकता होती है। हालांकि भारत में 40 लाख रुपये माल के लिए व 20 लाख रुपये सेवाओं के लिए इनसे कम टर्नओवर का कारोबार करने वाले छोटे व्यवसायों को रजिस्ट्रेशन लेने की आवश्यकता नही है।
  2. अगर व्यवसाय असम, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर, मिजोरम, सिक्किम, मेघालय, नागालैंड या त्रिपुरा में है तो यह सीमा से कम टर्नओवर वाले छोटे व्यवसाय अपनी इच्छा से रजिस्ट्रेशन लेने का विकल्प चुन सकते है।
  3. लेकिन वे व्यक्ति जो विशेष रुप से माल या सेवाओं या दोनो की सप्लाई के व्यवसाय में लगें गए हुए है और जो टैक्स के लिए उत्तरदायी नहीं है या कर से पूरी तरह छूट प्राप्त है या एक किसान, भूमि की खेती से उपज की आपूर्ति की सीमा तक जीएसटी के तहत पंजीकरण के लिए उत्तरदायी नहीं है।


रजिस्टेशन के लिए कौन-कौन से डॉक्यूमेंटस की जरूरत होती है।

रजिस्ट्रेशन के लिए जिन कागजों की जरूरत होती है उनमें से कुछ इस प्रकार है-
  • प्रोप्राइटरशिप- मालिक के पैन कार्ड / मालिक की आधार कार्ड / बैंक विवरण / पते का सबूत
  • प्राइवेट लिमिटेड- कंपनी का पैन कार्ड / सभी निदेशकों के आधार / बैंक विवरण / पते का सबूत / एमओए / एओए / इनकॉरपोरेशन
  • पार्टनरशिप / एलएलपी- पार्टनर्स के पैन कार्ड / सभी निदेशकों के आधार / बैंक विवरण / पते का सबूत / पार्टनरशिप डिड / एलएलपी सर्टिफिकेट

एक आवेदन को कॉमन पोर्टल (GSTN) के माध्यमसे किया जाता है। यह रजिस्ट्रेशन करने के लिए देयता उत्पन्न होने की तारीख से तीस दिनों के भीतर किया जाना चाहिए। सक्षम अधिकारी को या तो कोई प्रश्न उठाना होगा या तीन कार्य दिवसो के भीतर रजिस्ट्रेशन के अनुदान को मंजूरी देनी होगी। ऐसा न करने पर रजिस्ट्रेशन को स्वीकृत माना जाएगा।


जीएसटी में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है

कुछ श्रेणियों के आपूर्तिकर्ताओं को उनके टर्नओवर के बावजूद अनिवार्य पंजीकरण प्राप्त करने की आवश्यकता होती है, यानी 40 लाख रुपये या 20 लाख रुपये की सीमा छूट, जैसा भी मामला हो, उनके लिए उपलब्ध नहीं है।
ऐसे कुछ आपूर्तिकर्ता जिन्हे अपने टर्नओवर के आकार की परवाह किए बिना अनिवार्य रुप से पंजीकरण करने की आवश्यकता है, वे कुछ इस प्रकार है-
  1. यदि आप अंतरराज्यीय वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति में शामिल हैं।
  2. आपूर्ति प्राप्त करने वाला व्यक्ति जिस पर प्राप्तकर्ता द्वारा रिवर्स चार्ज के आधार पर एक देय होता है।
  3. कैजुअल टैक्सेबल पर्सन जिसका उस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में व्यवसाय का निश्चित स्थान नहीं है, जहाँ से वह आपूर्ति करना चाहता है।
  4. नॉन रेजिडेंट टैक्सेबल पर्सन जिसका पास भारत में व्यापार का निश्चित स्थान नहीं है।
  5. एक व्यक्ति जो किसी अन्य कर योग्य व्यक्ति की ओर से आपूर्ति करता है।
  6. ई-कॉमर्स ऑपरेटर (अमेजन, फ्लिपकार्ट, स्नेपडिल आदी), जो आपूर्तिकर्ताओं को इसके माध्यम से आपूर्ति करने के लिए मंच प्रदान करते है।


जीऐसटी में रजिस्ट्रेशन रद्द कैसे और कब करते है।

  1. जीएसटी को रजिस्ट्रेशन को दो प्रकार से रद्द किया जा सकता है। एक जब कर योग्य व्यक्ति को अबइसकी आवश्यक्ता नहीं है (वॉलंटरी कैंसिलेशन) और दूसरा जब उचित अधिकारी कुछ निर्दिष्ट चूको के मद्देनजर रजिस्ट्रेशन को रद्द करने के लिए उत्तरदायी मानता है, जैसे कि जब रजिस्टर हुए नंबर से व्यवसाय नहीं हो रहा हो या यदि वह माल या सेवाओं की आपूर्ति किए बिना कर बिल जारी करता है।
  2. रजिस्ट्रेशन रद्द करने के इच्छुक टैक्सपेयर 30 दिनों के भीतर सामान्य पोर्टल पर आवेदन कर सकता है। उचित अधिकारी को आवेदन की तिथि से 30 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन रद्द करना होगा।

रद्द हुए रजिस्ट्रेशन को दोबारा कैसे प्राप्त करे-

  1. ऐसे मामले में जहाँ रजिस्ट्रेसन उचित अधिकारी द्वारा स्वत- रद्द कर दिया जाता है, टैक्सपेयर रद्दीकरण आदेश मिलने के 30 दिनों के भीतर आवेदन कर सकता है। अधिकारी से उसके द्वारा उसके रद्द किे हुए रजिस्ट्रेशन को दोबारा प्राप्त करने का अनुरोध कर सकता है।
  2. हालांकि, ऐसा करने से पहले, व्यक्ति को सभी लंबित रिटर्न दाखिल करने होंगे व सभी बकाया का भुगतान करना होगा। संतुष्ट होने पर, उचित अधिकारी उसके द्वारा पूर्व में दिए गए आदेश को रद्द कर सकता है।

कानूनी निष्कर्ष:

जीएसटी तीन अलग अलग प्रकार सीजीएसटी (केंद्र माल और सेवा कर), एसजीएसटी (राज्य माल और सेवा कर) और आईजीएसटी (एककृत माल और सेवा कर) में विभेदित है। व्यवसाय को एक कानूनी इकाई बनने के लिए रजिस्ट्रेशन आवश्यक है और इसके कई फायदे भी है। जैसे कि फर्म को बँक से लोन लेने में आसानी. अंतरराज्यीय व्यापार करने में आसानी व बडी कंपनियों को टेंडर मिलने में भी आसानी होती है।


आज हमने इस लेख के माध्यम से जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कैसे करते है? | How to register in GST in Hindi? इसके बारेमें संपूर्ण मार्गदर्शन कर लिया है। आशा है आपको यह लेख पसंद आया होगा। इसी तरह कानूनी जानकारी के लिए आप हमारे इस पोर्टल apanahindi.com पर आवश्य भेट दें।




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