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क्या दाखिल खारिज का मतलब मालिकाना हक्क नहीं | mutation of property | dakhil kharij ka matalab

क्या दाखिल खारिज का मतलब मालिकाना हक्क नहीं | mutation of property | dakhil kharij ka matalab


समाज में बहोतसे लोगों को ऐसा लगता है के यदी किसी संपत्ति पर उनका नाम दाखिल खरिज याने mutation of property हो जाने से उन्हे उस संपत्ति का मालिकाना हक्क मिलता है। इसी बात को समझने के लिए आज हम इस पोस्ट के माध्यमे से मा. सुप्रिम कोर्ट का एक अहम न्यायनिर्णय देखने वाले है जिसमें दाखिल खारिज (Mutation) का मतलब मालिकाना हक्क नहीं | mutation of property इसके बारे में जानकारी हासिल करने वाले है।


दाखिल खारिज (Mutation) का मतलब मालिकाना हक्क नहींः सुप्रीम कोर्ट | mutation of property

सुप्रीम कोर्ट ने जितेंद्र सिंह बनाम मध्य प्रदेश सरकार एसएलपी (सी) 13146/2020 मे 6 सितंबर 2021 को संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। सर्वोच्च न्यायालय ने फिर एक बार दोहराया कि रेवेन्यू रिकॉर्ड में संपत्ति के दाखिल-खारिज (Mutation of property) से न तो संपत्ति का मालिकाना मिल जाता है और न ही समाप्त होता हैं। संपत्ति का मालिकाना हक केवल एक सक्षम सिविल कोर्ट की तरफ से ही तय किया जा सकता है।

क्या मामला था

इस मामले में रिवा संभाग के एडिशनल कमिश्नर ने याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत वसियत के आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में उसका नाम बदलने का निर्देश दिया था। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कुछ पक्षों द्वारा दायर एक याचिका में आदेश को रद्द कर दिया और याचिकाकर्ता को 20/05/1998 की कथित वसीयत के आधार पर अपने अधिकार को स्पष्ट करने के लिे उपयुक्त अदालत का दरवाजा खटखटाने का निर्देश दिया। इसलिए याचिकाकर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विशेष अनुमति याचिका दायर की।


रेवेन्यू रिकॉर्ड में एंट्री सिर्फ वित्तीय उद्देश्य के लिए

जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस अनिरूध्द बोस की बेंच ने कहा कि रेवेन्यू रिकॉर्ड में सिर्फ एक एंट्री से उस व्यक्ति को संपत्ति का हक्क नही मिल जाता जिसका नाम रिकॉर्ड में दर्ज हैं। बेंच ने कह कि रेवेन्यू रिकॉर्ड या जमाबंदी में एंट्री का केवल वित्तीय उद्देश के लिए होता है जैसे, भू-राजस्वा का भुगतान। ऐसी एंट्री के आधार पर कोई मालिकाना हक्क नहीं मिल जाता हैं।

सिविल कोर्ट तय करेगा कानूनी अधिकार

सर्वोच्च न्यायालय ने बलवंत सिंह बनाम दौलत सिंह (1997) मामले में दिये गये अपने फैसले का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि कानून के तय प्रक्रियाओं के अनुसार, यदि टाइटल के संबंध कोई विवाद है और विशेष रुप से जब वसीयत के आधार पर म्यूटेशन प्रविष्ट की मांग की जाती है, तो वसीयत के आधार पर टाइल/अधिकार का दावा करने वाली पार्टी को उपयुक्त सिविल कोर्ट का रुख करना होगा और अपने अधिकारों को स्पष्ट कराना होगा और उसके बाद ही सिविल कोर्ट के निर्णय के आधार पर आवश्यक म्यूटेशन एंट्री की जा सकती हैं।


इस लेख के माध्यम से हमने दाखिल खारिज (Mutation) का मतलब मालिकाना हक्क नहीं | mutation of property इसके बारेमें चर्चा किये है। ऐसे ही कानूनी जानकारी के लिए आप हमारे इस पोर्टल apanahindi.com पर आवश्य भेट दे।




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