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यौन शोषण क्या है? | कार्यस्थल क्या है? | कार्य स्थल पर महिला का यौन शोषण अधिनियम

यौन शोषण क्या है? | कार्यस्थल क्या है? | कार्य स्थल पर महिला का यौन शोषण अधिनियम


जिस्तरह से समाज मे विकास होता जा रहा है उसी तरह महिलाएं पुरूष के साथ कंधेसे कंधा मिलाकर काम कर रहे है। लेकीन उन्हे जहाँ पर वे काम करते है वहा पर उन्हे न चाहते हुवे भी उनका शोषण होता है। जहा महिला काम करते है वहा पर उनके वरिष्ट अधिकारी द्वारा उनका यौन शोषण भी किया जाता है। तो ऐसे परिस्थिति मे महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा कार्य स्थल पर महिला का यौन शोषण अधिनियम यह विशेष कानून बनाना जरूरी हो गया। जो के हर महिला को जानना जरूरी है। तो आइए इस लेक के माध्यम से हम यौन शोषण क्या है?, कार्यस्थल क्या है? और कार्य स्थल पर महिला का यौन शोषण अधिनियम इस कानून के बारेमे जानकारी हासिल करते है।

यौन शोषण क्या है?

यौन शोषण में सम्मिलित हैः शारिरिक संपर्क करना या शारिरिक संबंध स्थापित करने का पहल करना, यौन-क्रिया अथवा संबंध के लिए मांग करना या निवेदन करना, लैंगिक टिप्पणी करना, कामुक चित्र या साहित्य दिखाना और कोई अन्य शारीरिक या मौखिक इशारे से किया गया यौन-संबंधित व्यावहार। को यौन शोषण कहते है।


कार्यस्थल क्या है?

इस अधिनियम के तहत महिलाओं के कार्यस्थल का दायरा काफी बडा है। यहांपर हम महिलाओं के कार्यस्थल के कुछ उदाहरण देखते है वे निम्नलिखित हैः

  1. सभी सरकारी विभाग और गैर सरकारी विभाग अथवा संस्था
  2. आवास या मकान या असंगठित क्षेत्र
  3. अस्पताल एवं नर्सिंग होम
  4. सोसायटी, ट्रस्ट, एन.जी.ओ. आदि.
  5. खेल संस्थान, स्टेडियम, स्पोर्टस कॉम्प्लेक्स आदि

इसतरह महिलाओं के कार्यस्थल का दायरा बताया गया है।

कार्य स्थल पर महिला का यौन शोषण अधिनियम

हमारे भारत देश के विकास के लिए महिलाओं की उपस्थिति और उनकी भूमिका बहद आवश्यक है। हमारे देश में हर प्रकार के कार्यस्थल पर महिलाओं की उपस्थिति बढती जा रही है, जो कि एक सकारात्मक बदलाव है। महिलाए हर प्रकार के क्षेत्रर मे पुरूषो के समान काम करने का हौसला रखती है। यह बदलाव केश के विकास के लिए बहोत महत्वपुर्ण काम करता है। लेकिन, इस बदलाव के साथ-साथ कुछ तुछ सोच वाले व्यक्ति यो के वजाह से महिलाओं को कार्यस्थल पर न चाहते हुवे भी यौन शोषण जैसे उत्पीडन का सामना करना पडता है, और इसतरह के कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीडन के मामले भी काफी तेजीसे सामने आने लगे हैं। इस तरह के मामलों में महिलाओं के संविधानिक और मानवाधिकारों का उल्लंघन होता रहा है। इस तरह के कार्यस्थल पर होने वाले यौन शोषण जैसे मामलों से निपटने के लिए और महिलाओं को सशक्ति करण करने के लिए भारत में एक विशेष कानून बनाया गया है, जिसके बारे में सभी महिलाओं को पता होना चाहिए।

इस कानून के लिए मा. सुप्रीम कोर्ट का योगदान

  1. सन अगस्त 1997 में मा. सुप्रीम कोर्ट द्वारा विशाखा बनाम राजस्थान सरकार इस मामले में कार्यस्थल पर महिलाओं की लैंगिक समानता के बारेम व्याख्या की गई थी और माननिय सुप्रीम कोर्ट द्वारा कहा गया था कि किसी भी कार्यस्थल पर किया गया महिलाओं का यौन उत्पीजन स्पष्ट रूप से संविधान के अनुच्छेद 14, 15, एवं 21 का हनन होता है। मां सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यौन उत्पीडन उस मूलभूत अधिकार का भी उल्लंघन है जो अनुच्छेद 19(1) के तहत किसी भी व्यावसाय, व्यापार अथवा कारोबार चुनने की संवतंत्रता प्रदान करता है।
  2. माननिय सुप्रीम कोर्ट ने कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीडन रोकने के लिए कुछ दिशानिर्देश जारी किए थे जो यौन उत्पीडन की शिकायत मिलने पर संस्थानों को अनुसरण करने थे। कोर्ट ने कहा था कि जब तक यौन उत्पीडन के लिए कोई कानून लागू नहीं हो जाता तब तक ये दिशानिर्देश बाध्य होंगे।

क्या कहता है कानून?

  1. कार्यस्थल पर महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीडन के मामलों को रोकने के लिए भारतीय संसद ने कार्यस्थल पर महिला का यौन शोषण (निवारण, निषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम 2013 पारित किया था। यह अधिनियम जो महिला कर्मचारी जीस कार्यस्थल पर आती जाती है तथा घरेलू मजदूर को सुरक्षा प्रदान करता है।
  2. इस अधिनियम का उद्देश्य यह है की, कार्यस्थल पर महिलाओं को यौन शोषण से बचाना कार्यस्थल पर यौन उत्पीडन को रोकना, यौन उत्पीडन के मामलों को सुलझाना तथा ऐसे मामलों पर कार्यवाही करना जो कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन शोषण से जुडा या संबंधित हो।

इस अधिनियम की धारा 3(2) के अंतर्गत निम्न परिस्थितियां भी अन्य परिस्थितियों के साथ यौन उत्पीडन में शामिल होते हैः

  1. प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से महिला को उसके रोजगार में अधिक मान और महत्व देने का वायदा करना।
  2. प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से महिला को उसके रोजगार मे अहितकारी या हानिकारक व्यवहार करना और उसको धमकी देना।
  3. प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से महिला को उसके वर्तमान और भविष्यके रोजगार के बारेमें धमकी देना।
  4. महिला के कार्य में व्यवधान डालना या महिला के लिए डरावना या आत्र्कामक वातावरण बनाना।
  5. अपमानजनक व्यवहार जिससे महिला की सेहत व सुरक्षा प्रभावित हो।

शिकायत कहां की जा सकती है?

इस अधिनियम के तहत आंतरिक शिकायत कमेटी और स्थानीय शिकायत कमेटी का गठन किया जाता है जहां कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन शोषण की शिकायतें सुनी जाती हैं।

  1. ऐसा कोई कार्यस्थल जहां 10 या अधिक कर्मचारीहो वहां पर एंपलॉयर की यह जिम्मेदारी है कि वह लिखित मे एक आंतरिक शिकायत कमेटी बनाएगें। और कार्यस्थल से जुडी महिलाओं के यौन उत्पीडन की शिकायतें इस आंतरिक शिकायत कमेटी के समक्ष दर्ज की जाती है।
  2. हर जिला के जिला अधिकारी संबंधित जिले मे एक स्थानीय शिकायत कमेटी बनाएगें। स्थानीय शिकायत कमेटी का अधिकार क्षेत्र उस पूरे जिले में होता है जहां इसका गठन किया गया है। इस कमेटी का काम है महिलाओं के यौन उत्पीडन की उन शिकायतों का निपटारा करना जो उन संस्थानो से आती है जहां 10 कर्मचारी से कम होने के कारण आंतरिक शिकायत कमेटी का गठन नहीं है या फिर जहां शिकायत स्वयं एंपलॉयर के खिलाफ हो।

कानूनी सलाह

  1. यदि किसी महिला के साथ उसके कार्यस्थल पर यौन शोषण होता है तो उसकी शिकायत तुरंत दर्ज करानी चाहिए। कोई भी पीडित महिला घटना होने के 3 महीने के भीतर अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है। आंतरिक कमेटी या स्थानीय कमेटी द्वारा यह समय सीमा 3 महीने के लिए और बढाई जा सकती है। यह समय सीमा तभी बढाई जा सकती है, जब उचित कारण हो तथा उन कारणों को लिखीत में रिकॉर्ड किया जाए।
  2. इस कानून के बावजूद भारत मे महिलाओं के लिए ऐसी शिकायतें करना शुरू से ही थोडा मुश्किल रहा है। इसलिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने इन समस्याओं से समाधान पाने के लिए महिलाओं के लिए एक बाल विकास मंत्रालय, एक ओनलाईन पोर्टल बनाया है जिसे शी-बॉक्स कहते है। यह पोर्टल यहां उपलब्द है- http://www.shebox.nic.in जिस पर जाकर यौन शोषण की शिकायत ऑनलाइन दर्ज की जा सकती है।


इस लेख के माध्यमसे  हमारे पाठको को हमने  यौन शोषण क्या है?, कार्यस्थल क्या है?, कार्य स्थल पर महिला का यौन शोषण अधिनियम इसके बारेमे जानकारी बताने की कोशिश कि है। जो के हर किसी को पता होना जरूरी है।





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