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आई.पी.सी. धारा 304 B क्या है? | दहेज मृत्यु क्या है? | क्रोस ऐग्जामिनेशन के नमुना प्रश्न | What is section 304 B of IPC

आई.पी.सी. धारा 304 B क्या है? | दहेज मृत्यु क्या है? | क्रोस ऐग्जामिनेशन के नमुना प्रश्न | What is section 304 B of IPC


भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 304 B यह दहेज मृत्यु से संबंधित सजा देने का प्रावधान बताती है। जहां किसी स्त्री की मृत्यु उसके विवाह के 7 वर्ष के भीतर ही हो जाती है। इसलिये इसे दहेज मृत्यु कहा गया है। इसके बारेमे हम इस लेख के माध्यम से विस्तार से चर्चा करते हैं।


दहेज मृत्यु क्या है?

दहेज मृत्यु यह है की जिस किसी स्त्री की मृत्यु उसको पहुंचाए गये शारीरिक क्षति द्वारा उसके विवाह के 7 वर्ष के भीतर हो जाती है तो उसे दहेज मृत्यू कहा जाता है। साथ ही, उसकी मृत्यु के पूर्व उसके पति द्वारा अथवा उसके पति के किसी रिश्तेदारों द्वारा दहेज के लिऐ मांग किया  गया हो और उसके संबंध में उसके साथ क्रूरता कीया गाया हो अथवा उसे तंग किया था जिसके वजाह से मृत्यू हो गई हो तो ऐसी मृत्यु को दहेज मृत्यु कहा जाएगा और ऐसे पति अथवा रिश्तेदार के खिलाफ इस धारा 304 B के अंतर्गत दहेज मृत्यू का अपराधी माने जाएंगे।



धारा 304 B दहेज मृत्यु:-

(1) जहाँ किसी स्त्री की मृत्यु किसी दाह या शारीरिक क्षति द्वारा कारित की जाती है या विवाह के सात वर्ष के भीतर सामान्य परिस्थितियों से अन्यथा हो जाती है और यह दर्शित किया जाता है कि उसकी सत्य के कछ पूर्व उसके पति ने या उसके पति के किसी नातेदार ने, दहेज की किसी मांग के लिए, या उसके सम्बन्ध में. उसके साथ क्रूरता की थी या उसे तंग किया था, वहाँ ऐसी मृत्यु को “दहेज मृत्यु” कहा जाएगा, और ऐसा पति या नातेदार उसकी मृत्यु कारित करने वाला समझा जाएगा।
स्पष्टीकरण-
इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए “दहेज”का वही अर्थ है जो दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 (1961 का 28) की धारा 2 में है।
(2) जो कोई दहेज मृत्यु कारित करेगा वह कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा।


Section 304 B Dowry Death

(1) Where the death of a woman is caused by any burns or bodily injury or occurs otherwise than under normal circumstances within seven years of her marriage and it is shown that soon before her death she was subjected to cruelty or harassment by her husband or any relative of her husband for, or in connection with, any demand for dowry, such death shall be called “dowry death”, and such husband or relative shall be deemed to have caused her death.
Explanation.—For the purpose of this sub-section, “dowry” shall have the same meaning as in section 2 of the Dowry Prohibition Act, 1961 (28 of 1961).
(2) Whoever commits dowry death shall be punished with imprisonment for a term which shall not be less than seven years but which may extend to imprisonment for life.


Classification of Offence

1) Punishment- Imprisonment for not less than 7 years but which may extend to life Imprisonment.
2) Cognizable
3) Non-Bailable
4) Triable by Session Court
5) Non-Compoundable


कंप्लेनंन्ट द्वारा निम्नलिखित साबित किऐ जाने वाले मुद्देः-

दहेज मृत्यू के मामले में, कंप्लेनंन्ट द्वारा निम्नलिखित मुद्दो को साबित करने की आवश्यकता होती है।
  1. एक विवाहित महिला की मृत्यु जलनेसे या शारीरिक चोट पहुंचाने से अथवा प्राकृतिक कारणों के अलावा किसी अन्य दुसरे कारणों की वजाह से हुई थी।
  2. इस प्रकार मृत्यु विवाह के 7 वर्ष के भीतर हुई।
  3. ऐसी विवाहित महिला को उसके पति द्वारा या उसके पति के किसी अन्य रिश्तेदार द्वारा परेशान अथवा उत्पिडन किया जाता था।
  4. दहेज की मांग के संबंध में उत्पीड़न किया गया था।


पिछले कुछ वर्षों में दहेज के मामलोमे और विवाहित महिलाओं के उत्पीड़न के मामलों में तेजी से वृद्धि होते हुवे दिखाई दे रही है। महिलाओं के प्रति अदालत की एहसान और संवेदनशीलता को महसूस कर सकते है। इनमें से कई मामलों में कोर्ट की राय महिलाओं के पक्ष में नजर आती है। हालांकि, जैसे-जैसे ऐसे मामलों की संख्या बढ़ती गई और जब हकिकत अदालत के सामने आते गऐ, तो अदालत को ऐसे मामलों की सत्यता पर संदेह होने लगा। महिलाओं की सुरक्षा के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 498 (ए) और 304 (बी) लागू कीया गया। लेकिन उनका व्यापक रूप से दुर्व्यवहार और गलत इस्तेमाल होते हुवे नजर आने लगा।

ऐसे में अदालती मामलों को संभालने में वकीलों की भूमिका सर्वोपरि है। दहेज प्रताड़ना मामले में पति और उसके परिवार के लगभग सभी लोगोको शामिल किया जाता है। इसमें विवाहिता, पति की बहन, जो अपने ससुराल में रह रही है, उसे भी आरोपी किया जाता है।

ऐसे केसेस को चलाने से पेहले और गवाहो के क्रोस ऐग्जामिन करने से पेहले मामले से जुडे पूरे तथ्य और आरोपी पक्ष तथा फिर्यादी पक्ष उन के पारिवारिक स्थिति को जानना जरूरी होता है।


क्रोस ऐग्जामिनेशन के नमुना प्रश्नः-

धारा 304 (बी) के तहत चलाए जाने वाले मामलो में, विवाहित महिला की मृत्यु होने की सबसे अधिक संभावना होती है, और उसके मायके वाले रिश्ते शिकायतकर्ता होते है। ऐसे मामलों में अभियोजन पक्ष के गवाह भावुक और आहत होते हैं। इसलिए क्रोस ऐग्जामिनेशन के दौरान आरोपी पक्ष के वकीलों के हालात को समझलेते हुवे क्रोस ऐग्जामिनेशन करने की आवश्यकता होती है।

  1. मृत लड़की का विवाह करने का फैसला करते समय, उसे पूरी तरह भरोसे मे नहीं लिया गया था।
  2. बेटा (पति) पढ़ा-लिखा नहीं है और वह गवारो की तरह व्यवहार करता है।
  3. मृत लडकी शिक्षित थी और उसे हमेशा शहरी जीवन में जिंदगी गूजारने मे रुचि रखती थी।
  4. इसलिए वह लगातार गाँव छोड़कर शहर में जा कर रहने के लिऐ आग्रह कर रही थी।
  5. लडकी अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने की जिद कर रही थी।
  6. और इन सब बातों के लिए पति और उसका परिवार तैयार नहीं था।
  7. इस वजाह से लडकी हमेशा दुखी रहती थी।
  8. पती का एकत्रीत हींदू परिवार है।
  9. उसकी सभी बहनें पहले से ही शादीशुदा हैं।
  10. पती की आर्थिक स्थिति आपसे बेहतर है।
  11. आपकी बेटी की शादी आरोपी नंबर 1 लड़के से पारंपरिक तरीके से हुई थी।
  12. दोनों पक्ष एक दूसरे की आर्थिक स्थिति से पूरी तरह वाकिफ थे।
  13. पति के घर की आर्थिक स्थिति आपसे बेहतर है। तो इसलिऐ पति ने दहेज के बारे में कभी शिकायत नहीं की।
  14. विवाह के समय दूल्हे ने लड़की शिक्षीत होने के कारण किसी भी प्रकार की कोई मांग नहीं की।
  15. विवाह के समय आपने अपनी पसंद के नुसार घरेलू सामान दिया थे।
  16. दुल्हे को रिती रिवाजो के अनुसार आपने कपड़े आदि पहनने के लिए दिये थे।
  17. दुल्हे ने कभी भी पैसे की मांग नहीं की या उन कारणों से दुल्हन को कभी परेशान नहीं किया गया।
  18. गांव में नदी किनारे कपडे धोने जा रही लडकी की पानी मे डूबने के कारण मौत हो गई।
  19. लड़की तैर नहीं सकती थी।
  20. घटना होते ही आपको तुरंत घटना की सूचना दी गई।
  21. आपके लड़की की मृत्यु हो जाने के कारण आपने आरोपी के खिलाफ केवल अतिरिक्त उद्देश्य के लिए झूठी शिकायत दर्ज की है।


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