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20 वर्ष से कम अवधि की लीजडीड का प्रारूप | Format of Lease deed of less than 20 years

20 वर्ष से कम अवधि की लीजडीड का प्रारूप | Format of Lease deed of less than 20 years


20 वर्ष से कम अवधि की लीजडीड


यह पट्‌टा श्री/श्रीमती------------------------------------------ आयू--------वर्ष, सुपुत्र/सुपुत्री श्री-----------------------------निवासी------------------------------------------------------- (जिसे आगे चलकर 'भू-स्वामी' (स्ंदक सवतक) कहा गया है) और जो कि इस पट्‌टे का एक पक्षकार है, श्री/श्रीमती------------------------------------------ आयू--------वर्ष, सुपुत्र/सुपुत्री श्री-----------------------------निवासी------------------------------------------------------- (जिसे आगे 'आभोगी' (Tenant) कहा गया है) और जो इस करार का दूसरा पक्षकार हैः-



यह दस्तावेज साक्ष्य हे कि, आगे रक्षित भाटक तथा आगे उल्लिखित आभोगियों की प्रसंविदा के प्रतिफल स्वरूप उक्त भू-स्वामी उक्त आभोगी के पक्ष में निवास गृह तथा उसके साथ बाह्‌य गृह (Out-house) गैरेज तथा कम्पाउण्ड आदि को (यहा पट्‌टे पर दी जाने वाली सम्पति की नगरपालिका संखया------------- रोड---------- और नगर----------- का विवरण तथा चौहद्‌दी


पुर्ब---------------------------,

पश्चिम-----------------------

दक्षिण------------------------

उत्तर------------------------


एतद्‌द्वारा पट्‌टे पर देता है, जिससे कि उक्त आभोगी उसे दिनांक---------------से-------------- वर्ष/वर्षो के लिए ---------------रूपये (----------------रू.) के मासिक भाटक पर, जो सदैव प्रत्येक मास के पहले सप्ताह में अग्रिम रूप से देय होगा, धारण करेगा और आगे आभोगी भू-स्वामी के साथ निम्नलिखित शर्तो के आधार पर एतद्‌द्वारा प्रसंविदा (Convenents) करता हैः-


  1. कि किराये (Tenancy) का प्रारंभ अंग्रेजी कैलैण्डर के मास के प्रथम दिन से प्रारम्भ होगा और ऐसे मास के अंतिम दिन समाप्ता होगा और एतद्दवारा रक्षित भाटक उस मास के प्रथम दिन देय हो जायगा पर उसकी अदायगी उक्त मास के प्रथम सप्ताह के भीतर की जायेगी।

  2. कि आभोगी पर मकान या पानी के किसी वर्तमान कर की अदायगी का दायित्व न होगा पर ऐसे अन्य तथा अतिरिक्त करों को, चाहे ऐसे कर पहले से ही लगाये गये हों, अदायगी आभोगी के ही द्वारा की जायगी, और नगरपालिका ऐसे करों को प्राप्त करने के लिए अधिकृत प्राधिकारी द्वारा कर की अदायगी के हेतु दी गयी रसीद की एक मास के भीतर भू-स्वामी के पास रजिस्ट्री करायी जायगी।

  3. कि भू-स्वामी अपने विकल्प पर (At his option) एतद्‌द्वारा अन्तरित भवन में मरम्मत करायेगा और प्रत्येक मरम्मत पर कम से कम एक मास का भाटक खर्च करेगा। यदि आभोगी चाहे तो वह सभी मरम्मतों की, परिवर्द्धनों (Addition) तथा परिवर्तनों (Altrations) की सूचना भू-स्वामी को देगा और उसकी अनुमति प्राप्त होने पर आभोगी उसे अपने खर्च पर करायेगा। आभोगी अन्तरित सम्पति की पर्याप्त रूप से मरम्मत करायेगा पर वह ऐसी मरम्मत नहीं करायेगा, जो कि आभोगी की कामतः उपेक्षा (Wilful Neglect) या साद्गाय क्षय (Intention Waste) से हुआ हो। ऐसी मरम्मतों को आभोगी स्वयं अपने खर्च से करायेगा।

  4. कि आभोगी भू-स्वामी या उसके अभिकर्ता को कर्मकारों के साथ या उनके बिना अन्तरित सम्पति पर या उसमें दिन में सुविधाजनक समय पर प्रवेद्गा करने की अनुमति इस प्रयोजन के लिए देगा कि जिससे वे उक्त सम्पति की अवस्था को देख और परीक्षा कर सके या उक्त सम्पति की मरम्मत करा सके या किरायेदार की ऐसी क्षति की सूचना दे सके कि जिससे किरायेदार ऐसी सूचना के या भू-स्वामी द्वारा ऐसी बढ़ायी गयी अवधि के भीतर उसकी मरम्मत करा सके।

  5. कि आभोगी उक्त सम्पति पर न तो स्वयं ही किसी प्रकार का कोई व्यापार या कारोबार करेगा या किसी अन्य व्यक्ति को ऐसा करने की अनुमति ही देगा और न ही किसी भी व्यक्ति को उस पर कब्जा करने की अनुमति देगा।

  6. कि आभोगी अपने आभोग को एक वर्ष  से अधिक की अवधि के लिए जारी रखना चाहे तो वह अपने इस अभिप्राय की कम से कम 15 दिन की सूचना देगा, अन्यथा आभोग एक वर्ष की अवधि पर समाप्त हो जायगी और आभोगी एतद्‌द्वारा अन्तरित सम्पति को निर्विघ्न और शांतिपूर्ण  ढंग से खाली करके कब्जा दे देगा।

  7. कि इस पट्‌टे की अवधि की समाप्ति पर या पर्यवसान के पद्गचात आभोगी एतद्‌द्वारा अन्तरित सम्पति को भू-स्वामी या उसके अभिकर्ता को उसी तरह की अच्छी हालत में देगा, जिसमें उसने उसे प्राप्त किया था पर यह इस शर्त के अधीन होगा कि आभोगी के दखल के वर्ष  में भू-स्वामी ने उक्त सम्पति पर या उसकी मरम्मत पर कम से कम एक मास का भाटक खर्च किया हो आभोगी को यह भी अधिकार होगा कि वह ऐसे हटाये जाने वाले स्थायकों (Fixtures) को जिसको उसने लगाया हो, हटा सकेगा परन्तु उसे किसी अन्य स्थायकों को हटाने की अनुमति नहीं होगी।

  8. कि भू स्वामी को यह अधिकार होगा कि वह सभी बकाये के देय भाटक की वसूली के अपने अधिकार पर प्रभाव डाले बिना वह इस विलेख में उल्लिखित द्यार्तो में से किसी भी शर्तो  के उल्लघंन पर आभोगी की बेदखली करा सकेगा। कोई ऐसे कर की, जिसकी आभोगी द्वारा अदायगी होनी है या जिसकी अदायगी का वह उत्तरदायी हो, बकाये भाटक के रूप में वसूली उस दद्गाा में की जा सकेगी जबकि आभोगी ने उसकी अदायगी भू-स्वामी को न की हो या भू-स्वामी के पास उसकी अदायगी की रजिस्ट्री न करायी हो, ऐसी मरम्मतों के खर्च की वसूली जिसे कराने का दायित्व आभोगी पर था पर जिसे उसने नहीं कराया, बकाया भाटक के रूप में वसूल की जा सकेगी।

  9. कि आभोगी एतद्‌द्वारा रक्षित भाटक की अदायगी करेगा और इस विलेख में दी गयी उन प्रसंविदाओं ओर द्यार्तो का पालन करेगा जिसके पालन और पूरा करने की उससे अपेक्षा की गयी हो और वह भू-स्वामी या उसके द्वारा अथवा अधीन अधिकारपूर्ण दावा (rightful claim) करने वाले किसी व्यक्ति के द्वारा कोई बाधा पहुंचाये बिना एतद्‌द्वारा अन्तरित उक्त सम्पत्ति पर शांतिपूर्ण एवं निर्विघ्न से दखल रखेगा असौर उसका उपयोग करेगा।

  10.  कि प्रसंग (Content)  द्वारा समनुजा (Allow) होने पर पद ''भूस्वामी'' तथा आभोगी जिनका इस लेख में प्रयोग किया गया है, क ख के अतिरिक्त उसके दायद ओर उसके समुदेद्गिाति (heirs & assings) तथा ग घ के अतिरिक्त् केवल उसके दायद और उत्तरजीवी भी सम्मिलित होगें।



उपरोक्त के साक्ष्यस्वरूप उक्त क ख तथा ग घ ने प्रथम बार ऊपर लिखे गये दिन तथा वर्ष  को -------------------------पर हस्ताक्षर कर दिये है।

 



                                                                                    हस्ताक्षर, क ख

                                                                        भू स्वामी 




                                                                                    हस्ताक्षर, ग घ

                                                                                        आभोगी

साक्षीगण

(1)-------------------

(2)----------------





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