Header Ads Widget

Ticker

6/recent/ticker-posts

Mortgage | बंधक पत्र क्या होता है | बंधक पत्र किसे कहते हैं | बंधक पत्र के प्रकार | बंधक पत्र भाग-1

Mortgage | बंधक पत्र क्या होता है | बंधक पत्र किसे कहते हैं | बंधक पत्र के प्रकार | बंधक पत्र भाग-1

Photo by Kindel Media from Pexels

परिचय


मनूष का अक्सर जिस दस्तावेजसे सामना होता है, वह बंधक पत्र है। ईसे अंग्रेजीमे मोर्टगेज डीड कहा जाता है। हर आदमी कभी ना कभी इस विषय के संपर्क में आता ही है। तो फिर यह बंधक पत्र क्यों बनवाना पडता है, और इसके प्रकार क्या हैं? ईस विषय के बारेमे संपूर्ण जानकारी आज हम ईस लेख के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे। यदि, समय के साथ भविष्य मे बंधक पत्र बनाने का वक्त आये, तो उस वक्त इसके बारे में पुरी जानकारी होनी चाहिए।


मनूष को व्यवहार में अक्सर पैसोंकी आवश्यकता होती रहती है। यह कमी व्यवसाय में हमेशा लगातार महसूस होती रहती है और फिर अंतमे कठिनाइयों के समय अपने जखमो को भरने के लिए मनूष द्वारा कई उपाय किए जाते हैं। कई बार आम आदमी पैसा उधार लेकर अपनी जरूरतों को पूरा करता हैं, जबकि कई बार पैसो की जरूरत पूरी करने के लिए, सहकारी संस्थाओं जैसे कि को-ऑपरेटिव क्रेडिट बँक आदि से पैसा लिया जाता है। और तो इस पर ब्याज भी दिया जाता है। इसतरह उन जरूरतो को बडी मुश्किलो से पूरा किया जाता है। यह सभी बाते स्व सामान्य विषयोके बारे में था। लेकिन, अक्सर धन की आवश्यकता इतनेमे ही पुरी नहीं होती है। तभी ऐसे समय में कर्जा देनेवाले व्यक्ती को अथवा फिर कर्जा देनेवाले संस्थान को ऐसे समय मे कर्ज देने के लिए कर्जदार के और से एक गारंटी की आवश्यकता होती है। अथवा यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि यदि उस राशि का भुगतान नहीं किया गया तो क्या करें। इसके बारेमे एक गारंटी चाहिए होती है।


तब एसे समय मे कर्जालेनेवाला व्यक्ती यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी अन्य परिसंपत्तियों को गिरवी रखता है। उस समय बंधक करने के लिए क्या-क्या शर्तें हैं? अथवा किन शर्तों को पूरा करना आवश्यक होगा? इस सब के बारे में जानने का प्रयास करगे। आइए, ईससे पहले हम यह विचार करते है कि, किन वस्तुओं को गिरवी रखा जा सकता है।


बंधक के पास कुछ भी गिरवी रखने लायक जो भी संम्पत्ति हो और अगर बंधक लेने वाला सहमत हो। तो उस संम्पत्ति को गिरवी रख सका है। वह संम्पत्ति चाहे खुद की जमीन हो सकती है, व्यवसाय, ब्लॉक, गुडविल अथवा चल संपत्ति जैसे सोने के गहने, मूल्यवान वस्तु, कुछ भी जिसे गिरवी रखा जा सकता है। लेकिन, इसके लिए निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना आवश्यक है।

  1. गिरवी रखी जानेवाली संम्पत्ति पूरी तरह से बंधक लिखकर देनेवाले के स्वामित्व में होनी चाहिए।
  2. गिरवी रखी जानेवाली संपत्ति गिरवी रख कर लेने वाले के उपयोगमे आनेवाली चाहिए।
  3. गिरवी रखी गई संपत्ति ऋण के समान मूल्यवान होनी चाहिए।



आइए उन महत्वपूर्ण चीजों को देखें जो अचल और चल संपत्ति में आती हैं:-

1) अचल संपत्ति:-

भूमि / जमीन, जमीन पर स्थायी वस्तुएं, उदा. घर, शेड, भवन, पेड़ आदि। भूमि और भूमि से मिलनेवाले सभी लाभ। भूमि और अन्य अधिकार। उदाहरण के लिए, पट्टे का अधिकार, जाने का अधिकार और इसके साथ आने वाली हर चीज अचल संपत्ति में आती है। 

2) चल संपत्ति:-

कीमती सामान, सोने और चांदी के आभूषण, बर्तन,  फर्नीचर, अलमारी और इसी तरह की वस्तुएं, कारखाने में इस्तेमाल होनेवाली मशीनरी, बीमा पॉलिसी आदि। याहॉ पर ध्यान रखने वाली एक महत्वपूर्ण बात ये है के, चल संपत्ति में यहां तक कि गैर-मौजूद वस्तुएं भी शामील कीये जाते हैं और उन्हें भी गिरवी रखा जा सकता है। जैसे उदाहरणके लिये कारखाने में स्थापित मशीनरी, खेत में मौसमी फसलें आदि।

अब हमने कौनसे वस्तूओ को गिरवी रखी जा सकती है इसके बारेमे जानकारी देखी है। आइए, अब हम बंधक के प्रकार कितने है और उनकी कौन कौन सी विशेषताएँ है यह देखते है। यहा पर बंधक जिसे अंग्रेजी मे मोरगेज हिह कहते है। वह कैसे किया जाता है और उनमे क्या-क्या शर्तें होती हैं। यह सिखने और समझने के लिए सब को आसानी होगी। क्योंकि अंत में, यह सब बाते इस पर निर्भर करता है कि, संम्पत्ति को किस प्रकार के नुसार गिरवी रखि गयी है।


बंधक पत्र के प्रकार:-

बंधक पत्र के विभिन्न प्रकार होते हैं। उनमे महत्वपूर्ण प्रकार निम्नलिखित हैं।

1) सिम्पल मोर्टगेज:-

इस प्रकार के बंधक में, बंधककर्ता गिरवी रखी गई संपत्ति का कब्जा खुदके पास रखता है। याने के इस मामले में, गिरवी रखी गई संपत्ति का कब्ज़ा कभी भी गिरवीदार को नहीं दिया जाता, बल्कि देने वाले को दिया जाता है। गिरवी रखी संपत्ति को छुडवालेने का अधिकार गिरवी रखनेवाले के पास होता है। वह इन प्रकारों में भी अबाधित रहता है। साथ ही, अगर बंधक द्वारा तय समय के भीतर पैसा नहीं चुकाया जाता है, तो एसे हालात मे, बंधक संपत्ति बेची जा सकती है और बंधक से संबंधित राशि को वसूल कीया जा सकता है। यहा पर एक ध्यान मे रखने लायक बात यह है के, ईस बंधक पत्र को पंजीकृत करना कानून द्वारा अनिवार्य है। और साथ ही बंधकपत्र के दस्तावेज़ में बंधक संपत्ति को बिक्री की स्थिति मे होनी चाहिए, अन्यथा इसे बंधक के प्रकार में नहीं माना जाएगा। ऐसा निर्णय न्यायालय द्वारा दिया जाता है।

2) मोर्टगेज बाय कंडिशनल सेल:-

इस मामले में, गिरवी देनेवाला व्यक्ती द्वारा गिरवी लेनेवाले व्यक्तीको जाहिरा तौर पर गिरवी रखी गई संपत्ति को बेच देता है। इस स्थिति में, यदि पैसा नियत तारीख को चुकाया जाता है, तो गिरवी रखी गई संपत्ति की बिक्री अर्थहीन हो जाती है और वस्तु को गिरवीदार को लौटा दिया जाता है। इस मामले मे गिरवी देने वाले व्यक्ती का अधिकार नष्ट करना यह एक मात्र उद्देश गिरवीदार का होता है। सामान्य तौर पर, इस दस्तावेज को पंजीकृत करना आवश्यक होता है।

3) युज फ्रक्चर मोर्टगेज:-

इसे हिंदी में भोग-बन्धक ह्रिन के नाम से जाना जाता है। इस प्रकार के बंधक पत्र में बंधक संपत्ति का कब्जा बंधक लेने वाले व्यक्ती के पास हस्तांतरित कर दिया जाता है। गिरवी रखी गई संपत्ति तब तक गिरवी लेनेवालेके कब्जे में रहती है, जब तक के वह पुरितरह से रक्कम को चुकता नहीं करता। उस बंधक संपत्ति से मिलने वाले उत्पंन्न को गिरवी लेने वाले व्यक्ती द्वारा बंधक रक्कम का भुगतान करने के लिए इस्तेमाल कर सकता है। जिस समय पूरी रक्कम राशी को वसूल किया जाता है, उस समय गिरवी रखी गई संपत्ति मुळ मालक को दी जाती है। इस प्रकार के बंधक की ख़ासियत यह है कि गिरवी रखी गई संपत्ति को बेचने का अधिकार नहीं है। इसका मतलब है कि वह संपत्ति ना हीं बेचकर अपने पैसे वसूल नहीं कर सकता है। न ही बंधक को धन वापसी की मांग करने का अधिकार होता है। वह सिर्फ वस्तुसे आनेवाला उत्पंन्न ले सक्ता है। इस प्रकार के बंधक में महत्वपूर्ण बात यह है कि, बंधक संपत्ति को बेचने या बंधक को नष्ट करने का कोई तरीका नहीं है। एक उदाहरण देखे तो, कोंकण में आम के बाग करारनामे के तहत बंधक के रूप मे दिए जाते हैं और बदले में उन्हें कुछ रक्कम राशी का भुगतान किया जाता है। यह प्रकार कुछ इसी तरह का है। इस बंधक को सामान्य रूप से पंजीकृत / रजिस्टर करना भी बेहतर है।

4) इंग्लिश मोर्टगेज:-

इस प्रकार के बंधक में भी, गिरवीदार के पास ही गिरवी संपत्ति का कब्जा होता है। यदि गिरवी रखनेवाला सहमति के अनुसार पुरी रकम को चुकाता कराता है, तो गिरवी संम्पत्ति मुळ मालक को दे दिया जाता है। इसमे बेचना ही समाधान है। इसके अलावा, मोर्टगैगर भी पैसे चुकाने के लिए जिम्मेदार है। यह अक्सर अदालत में जाये बगैर संम्पत्ति को बेचा जाता है।

इसके अलावा, और दो प्रकार के बंधक है। आइये वह कौनसे है उसके बारेमे अन्य जानकारी प्राप्त करते हैं।

1. इक्विटेबल मॉर्गेज:-

इन प्रकार के बंधक पत्र मे, बंधक देने वाला, बंधक लेनेवाले को गिरवी संम्पत्ति का कब्जा नहीं देता है। विभिन्न दस्तावेज जिसमें बंधक लेनेवाले के अधिकार दिखाए गए हैं। इस प्रकार मे संम्पत्ति के दस्तावेजों को गिरवी रख दिया जाता है। इस मामले में, यदि दोनों पक्षों में समझौता है, तो इस प्रकार के बंधक के पंजीकरण की आवश्यकता है। इसमे भी गिरवी वस्तूको छुडानेका अधिकरार समाप्त नही होता। और साथ मे ही बेचने का भी एकमात्र उपाय है।

2. ॲनॉनिमस मोरगेज:-

यह एक प्रकार का बंधक पत्र है। जो सामान्य रूप से किसी अन्य बंधक प्रकार में नहीं आते हैं, वे सभी इस प्रकार के श्रेणी में आते हैं। इस बंधक पत्र में क्या होगा, यह ठीक से कह पाना संभव नहीं है। गिरवी संम्पत्ति का कब्ज़ा भी बंधक लेनेवाले को दिया जा सकता है। लेकिन एक ही समय में, यह संभव है कि यह नहीं दिया गया होगा। इसमें एक साधारण बिक्री या शर्तों के साथ एक प्रकार का बंधक शामिल है। इस संबंध में पंजीकरण भी अनिवार्य नहीं है। हालाँकि, गवाहों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं।


अब जब हमने बंधक पत्र के प्रकार और इसकी जानकारी के बारे में जान लिया है, तो अब यह लेख बहुत लंबा होगा, इसलिए हमने निम्नलिखित भागों में बंधक घटक पर एक करीब से नज़र डालेंगे। चूंकि यह लेख बंधक प्रकार के बारे में है, इसलिए अगला भाग बंधक पत्र के प्रत्यक जानकारी के बारे में होगा।


बंधक पत्र के प्रत्यक जानकारी भाग 2 के लिये यहा क्लिक करे


नोट:- एसेही कानूनी जानकारी हिंदी मे पाने के लिए हमारे टेलिग्राम चैनल Law Knowledge in Hindi को Join करे।



यह भी पढे


थोडा मनोरंजन के लिए


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ